कैंसर का डॉक्टर लड़ रहा है अन्ना की लड़ाई

पुनीत
Image caption पुनीत को उम्मीद है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी जंग सफल होगी.

कानपुर के अशोक नगर इलाक़े के अपने नर्सिंग होम में बैठे डॉक्टर पुनीत नाथ अपने मरीजों का इलाज करने के साथ-साथ उन्हें मानसिक रूप से मज़बूत बनाने का भी काम करते हैं.

उनका काम कठिन है, क्योंकि डॉ. नाथ कैंसर के डॉक्टर हैं और उनके पास आने वाले मरीज कई बार इतने हताश हो जाते हैं कि लगता है कि वे अपनी ज़िंदगी की जंग हार गए हों.

डॉ. पुनीत नाथ इन मरीज़ों को मानसिक रूप से मज़बूत बनाने में जी-जान से जुटे रहते हैं.

लेकिन डॉक्टर पुनीत नाथ की चर्चा इसलिए क्योंकि वे उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपनी क़िस्मत आज़मा रहे हैं.

कानपुर के कल्याणपुर से वे चुनाव मैदान में उतरे हैं और उनकी पार्टी का नाम है जन राज्य पार्टी. नर्सिंग होम के उनके कमरे में जब मैं उनसे मिला, तो वे जनसंपर्क के लिए निकलने वाले थे.

मेरा पहला सवाल यही था, जन राज्य पार्टी क्यों. उन्होंने फिर सारी बात बताई कि कैसे उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफ़ेशनल्स को लेकर ये पार्टी बनाई है.

उन्होंने बताया, "पार्टी का नाम जन राज्य पार्टी इसलिए रखा है, ताकि जनता का राज्य देश में स्थापित हो सके, जो फ़िलहाल नहीं है. जिन लोगों ने ये पार्टी बनाई है, वे आईआईटी से जुड़े हुए हैं, कुछ लोग डॉक्टर हैं और वकील भी हैं. देश की वर्तमान दशा बहुत कष्टकारक है."

अन्ना की तस्वीर

डॉक्टर पुनीत नाथ के चुनावी पोस्टरों में अन्ना की तस्वीर भी लगी हुई है और नारा दिया गया है- अन्ना के साथ, पुनीत नाथ.

ऐसा क्यों है, इसके जवाब में डॉक्टर नाथ बताते हैं, "हम अन्ना को अपना आदर्श मानते हैं, क्यों कि अन्ना भी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ हैं और हमारी पार्टी भी. दोनों के लक्ष्य एक हैं और उद्देश्य भी."

डॉक्टर पुनीत नाथ इससे बिल्कुल चिंतत नहीं कि बड़ी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों के बीच उनकी पार्टी दब कर रह जाएगी.

उनमें ज़बरदस्त विश्वास है. उन्होंने कहा, "कई पार्टियाँ भी पहले काफ़ी छोटी थी, लेकिन उन्होंने सतत प्रयास किया और उन्हें सफलता मिली. मुझे उम्मीद है कि हमें भी सफलता मिलेगी. हर संख्या ज़ीरो से शुरू होती है."

क्या कैंसर के मरीज़ों का ज़िंदगी के प्रति संघर्ष देखकर उन्हें भी प्रेरणा मिलती है, डॉक्टर नाथ कहते हैं, "कैंसर की फ़ील्ड बहुत मुश्किल है. यहाँ हालात कभी-कभी बहुत ख़राब होते हैं. कई बार मरीज़ काफ़ी पीड़ा में रहता है और हालात भी इलाज से बाहर हो जाते हैं. मैं भ्रष्टाचार के कैंसर से लड़ना चाहता हूँ, इसलिए मैंने ये कोशिश की है."

उन्हें उम्मीद है कि भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ उनकी जंग भले ही छोटे स्तर पर शुरू हुई है, लेकिन एक न एक दिन ये ज़रूर रंग लाएगी.

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