चार कमरे-चौदह बच्चे, पर हैं मायावती समर्थक

  • 24 फरवरी 2012
शांति
Image caption शांति चाहती हैं कि मायावती उनकी उम्मीदों को पूरा करें और इसलिए वे वोट तो मायावती को ही देंगी.

कानपुर की दलित बस्ती में रहने वाली शांति उस समय काफ़ी अशांत लग रही थी. निराशा उनके चेहरे से झलक रही थी. कुछ कहने के लिए बेकरार लग रही थी.

जैसे ही मेरा सामना हुआ, बोलीं- मेरे घर में बहुत समस्या है. लड़कों को नौकरी नहीं है, घर छोटा है. चाहे वो मायावती हों या कांग्रेस हो, हमें घर दो. हमारे बच्चों को नौकरी दें. हमारे बच्चे बर्बाद हो रहे हैं.

शांति आगे बताती हैं कि उनके पाँच बच्चे हैं और उनके बच्चों का भी परिवार है. उनके एक-दो पोतों की भी शादी हो गई है और उनके भी बच्चे हैं. घर में इतने लोग हो गए हैं कि उन्हें पक्का पता नहीं है कि उनके परिवार में कुल कितने सदस्य हैं.

हिसाब लगाने के बाद भी कहती हैं 13-14 लोग हैं. शांति का कहना है कि घर में काफ़ी समस्या है, सिर्फ़ चार कमरे हैं और इतने लोग. फिर शांति मुझे अपना घर दिखाने ले गईं.

उनके घर में चार कमरे हैं. वो बारी-बारी से अपने चारों कमरे दिखाती हैं. कहती हैं- क्या बताएँ इतनी बहुएँ हैं लेकिन बड़ी मुश्किल से घर में गुज़ारा हो पाता है. शांति कहती हैं कि उनके सामने घर की समस्या सबसे बड़ी हैं.

बहुओं से पर्दा

और तो और शांति के पति छेदी लाल को उसी कमरे के एक कोने में अपनी बहुओं के सामने लेटे रहना पड़ता है. हालात को थोड़ा बेहतर बनाने के लिए बहुओं ने बीच में पर्दा ज़रूर लटका दिया है.

लेकिन इन सबके बावजूद शांति मायावती की समर्थक हैं. जब मैंने इसकी वजह पूछी, तो बोलीं मायावती से उम्मीद हैं और वो चाहती हैं कि मायावती उनकी उम्मीदों को पूरा करें और इसलिए वे वोट तो मायावती को ही देंगी.

शांति कहती हैं, "मुलायम को मौक़ा देकर बहुत देख लिया, कुछ नहीं हुआ. हम तो मायावती को ही वोट देंगे."

इन मुश्किलों के बावजूद शांति का एक बेटा मायावती का कट्टर समर्थक है और चुनाव के दौरान वो हमेशा रैलियों के चक्कर में बाहर ही रहता है.

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