उमा से नाम तो हुआ, लेकिन क्या काम भी होगा?

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भारतीय जनता पार्टी की नेता और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री पद की दावेदार मानीं जा रही उमा भारती इस विधानसभा चुनाव से उत्तर प्रदेश में अपना राजनीतिक सफ़र शुरू कर रही हैं. वे बुंदेलखंड के चरखारी से चुनाव लड़ रही हैं.

बुंदेलखंड की चर्चा आजकल ग़रीबी, बेरोज़गारी, सूखा, पानी की समस्या के कारण होती है. लेकिन इन चुनावों में यही बुंदेलखंड एक रोचक सियासी जंग की जगह बन गया है.

उमा भारती के चरखारी से चुनाव लड़ने से इस इलाक़े में चुनावी लड़ाई को रोचक बना दिया है.

चरखारी में हर चौक-चौराहे पर चुनावी चर्चा ज़ोर पर है और लोग खुलकर बात करते हैं. हालाँकि चरखारी के आसपास के गाँवों में स्थिति कुछ अलग है.

ज़्यादातर लोग ये तो मानते हैं कि चरखारी से उमा भारती की स्थिति मज़बूत है, लेकिन कई लोगों को उमा भारती को लेकर शंकाएँ भी हैं.

कुछ लोग उन्हें बाहरी मानते हैं, तो कुछ लोगों को लगता है कि उमा भारती बाद में इस क्षेत्र को छोड़कर न चली जाएँ.

उम्मीद नहीं

सुमित ये तो मानते हैं कि उमा भारती के आने से चरखारी का नाम तो हुआ है, लेकिन उन्हें उनसे कोई उम्मीद नहीं है.

Image caption इलाके के सुमित चाहते थे कि प्रत्याशी स्थानीय ही हो.

उन्होंने कहा, "उनकी उम्मीदवारी से फ़र्क तो ज़रूर पड़ा है, लेकिन वो यहाँ काम नहीं करवा पाएँगी, जैसा हमलोग चाहते हैं. हमलोग चाहते थे कि कोई स्थानीय प्रत्याशी खड़ा हो. हम कोई बाहरी प्रत्याशी नहीं चाहते हैं."

दूसरी ओर उमा भारती के समर्थक नज़र आ रहे श्याम प्रकाश इस तर्क को खारिज़ करते हैं.

वे कहते हैं, "ये मुद्दा तो राजनीतिक लोग छोड़ते हैं, एक-दूसरे को ऊँच-नीच दिखाने के लिए. लेकिन मैं ऐसा नहीं मानता."

श्याम प्रकाश का कहना है कि उमा भारती ने यूपी से शुरुआत की है. वे बहुत अच्छी नेता रही हैं और मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री भी रही हैं, इसलिए उन्हें भरोसा है कि वे चरखारी का विकास करेंगी.

शकील तो ये मानते हैं कि उमा भारती यहाँ के जातिगत समीकरण को देखते हुए चुनाव लड़ने उतरी हैं, क्योंकि लोध जाति के लोग यहाँ ज़्यादा हैं.

लेकिन जब मैं पास के सोपा गाँव पहुँचा, तो कई लोग उमा भारती से नाराज़ से दिखें. चंद्रशेखर ने बताया कि उनके गाँव में कोई नेता नहीं आया और उमा भारती जब कुछ कर दें, वे तभी बोलेंगे.

तो उमा भारती के समर्थक हों या उनके विरोधी, ज़्यादातर लोग तो इस बात से सहमत नज़र आते हैं कि चरखारी का नाम हुआ है.

लेकिन जैसा कि बालादीन ने कहा- सिर्फ़ नाम से क्या होगा, काम भी करके दिखाएँ तभी बात बनेगी.

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