दिल्ली पुलिस और रामदेव दोनों दोषी:सुप्रीम कोर्ट

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Image caption न्यायालय ने रामलीला मैदान में हुई हिंसा के लिए दिल्ली पुलिस और बाबा रामदेव दोनों को दोषी ठहराया

दिल्ली के रामलीला मैदान पर पिछले साल चार जून को बाबा रामदेव के समर्थकों और दिल्ली पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प के मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरूवार को दिल्ली पुलिस और बाबा रामदेव दोनों को झाड़ लगाया.

उच्चतम न्यायालय ने रामलीला मैदान में हुई हिंसा के लिए दिल्ली पुलिस और बाबा रामदेव दोनों को दोषी ठहराया. कोर्ट ने आदेश दिया है कि घटना में हिंसा फैलाने के लिए दोषी पाए गए रामदेव के समर्थकों और दिल्ली पुलिस के जवानों के खिलाफ आपराधिक मामले चलाए जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ''ये मामला आम लोगों और सरकार के बीच विश्वास की कमी का सटीक उदाहरण है.''

कोर्ट में जस्टिस बीएस चौहान और जस्टिस स्वतंत्र कुमार की पीठ ने कहा कि इस घटना से उस सरकार की ताकत का अंदाज़ा दिखता है जिसने लोकतंत्र की जड़ पर प्रहार किया है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबा रामदेव ने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट ने ये बात बार बार दोहराया है कि सरकार के पास बहुत बड़ी ताकत होती है और उस ताकत का सरकार ने दुर्उपयोग किया, लोकतांत्रिक और मानवीय मूल्यों का हनन किया, क्रूरता की. धारा 144 शांति बहाल करने के लिए लगाई जाती है इन्होंने शांति भंग करने के लिए लगाई.''

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर दिल्ली पुलिस कमीशनर बीके गुप्ता ने कहा कि पुलिस अदालत के आदेशों का पालन करेगी.

उन्होंने कहा, ''रामलीला मैदान पर लाठीचार्ज का आदेश नहीं था और पुलिस के जिन जवानों ने लाठीचार्ज किया है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.''

मुआवजे की घोषणा

न्यायपीठ का मानना है कि अगर पुलिस और सरकार चाहती तो इस दयनीय हादसे को रोक सकते थे. जजों की पीठ ने कहा कि पुलिस शांति बहाल करने के लिए कार्रवाई करती है लेकिन उन्होंने खुद ही शांति भंग कर दी.

गौरतलब है कि रामलीला मैदान हादसे में कई लोग घायल हो गए थे, लाठीचार्ज में घायल हुई एक महिला की मौत भी हो गई थी.

बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा, “उच्चतम अदालत जब खुद कहती है कि हजारों सोते हुए लोगों पर पुलिस ने बर्बरतापूर्व कार्रवाई की है तो ऐसे में कोर्ट के इस आदेश से सहमति नहीं जताई जा सकती है.”

अदालत ने कहा है कि पुलिस ने सोते हुए लोगों पर लाठियां चलवाई, सरकार और पुलिस चाहती तो ये हादसा टल सकता था.

अदालत ने इस हादसे में मारी गई महिला राजबाला के परिजनों को पांच लाख रूपए मुआवज़े के तौर पर दिए जाने की घोषणा की है. गंभीर रूप से घायल हुए लोगों को पचास हजार रूपए का मुआवजा और मामूली तौर पर घायल हुए लोगों को 25,000 रूपए का मुआवज़ा देने की घोषणा की है.

रामलीला मैदान हादसे पर मीडिया में खबरें आने के बाद पिछले साल अदालत ने मामले को संज्ञान में लिया था.

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