बच नही सके श्रीप्रकाश जायसवाल चुनाव आयोग से

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Image caption सलमान खुर्शीद और बेनी प्रसाद वर्मा के बाद श्रीप्रकाश जयसवाल अब ऐसे तीसरे मंत्री हैं जिन्हें चुनाव आयोग ने नोटिस भेजा हैं.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को बहुमत न मिलने पर राष्ट्रपति शासन लगाने संबंधित बयान पर केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल फंसते जा रहे हैं.

कानून मंत्री सलमान खुर्शीद और इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के बाद कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल अब ऐसे तीसरे मंत्री हैं जिन्हें आचार संहिता उल्लंघन के मामले में चुनाव आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी किया हैं.

श्रीप्रकाश जायसवाल ने 23 फरवरी को कानपुर में कहा था कि कांग्रेस का बहुमत आ रहा है और यदि कुछ सीटें कम रह जाती हैं तो राष्ट्रपति शासन लगेगा.

भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने इस बयान को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन, असंवैधानिक व लोकतंत्र विरोधी बयान करार दिया था.

चुनाव आयोग ने इस मामले में हुए कानपुर के जिलाधिकारी से बयान की सीडी और रिपोर्ट भेजने को कहा था.

शुक्रवार को रिपोर्ट मिलने के बाद आयोग ने देर रात नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के मामले को लेकर कार्रवाई क्यों न की जाए. जायसवाल को 27 फरवरी को दोपहर दो बजे तक अपना पक्ष रखने को कहा है

जायसवाल को जारी की गई नोटिस में आयोग ने माना है कि उन्होंने यह बयान देकर छठे और सातवें चरण वाले जिलों के मतदाताओं को धमकाने का काम किया है कि वो या तो कांग्रेस को वोट दें या उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन का सामना करने के लिए तैयार रहें.

आयोग का कहना है कि जायसवाल का ये बयान आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है.

इधर बेनी प्रसाद वर्मा का मामला भी सोमवार तक टल गया है.

बेनी प्रसाद वर्मी ने आयोग से कहा था उन्हें सुनवाई का एक मौका दें और इसके लिए शुक्रवार का दिन तय किया था. सुनवाई के दौरान भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन को भी मौजूद रहना था. लेकिन बाद में शाहनवाज के अनुरोध पर सुनवाई की तारीख सोमवार तक बढ़ा दी गई है.

बेनी प्रसाद वर्मा का मामला

Image caption केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा से पहले केंद्रीय मंत्री खुर्शीद को इसी मुद्दे पर नोटिस मिला था

बेनी प्रसाद वर्मा ने 15 फरवरी को फर्रुखाबाद जिले की कायमगंज विधानसभा सीट पर चुनाव प्रचार करते हुए कहा था, " मुसलमानों के पास जमीन नही है, अपना रोज़गार नही है, अपने घर नहीं हैं....मुसलमानों को और सुविधाएँ दी जाएंगी. आरक्षण फिर भी बढ़ाया जाएगा. चाहे चुनाव आयोग इसके लिए मुझे नोटिस जारी कर दे."

खुर्शीद का मामला

इसी तरह, अल्ससंख्यकों को आरक्षण पर सलमान खुर्शीद ने एक चुनावी सभा के दौरान बयान दिया कि आयोग चाहे तो उन्हें फाँसी पर चढ़ा दे, लेकिन वे हक़ की बात करना जारी रखेंगे.

सलमान खुर्शीद के इस बयान को गंभीरता से लेते हुए चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल को पत्र लिखा और हस्तक्षेप की मांग की. चुनाव आयोग ने पत्र में कानून मंत्री के आचरण पर आपत्ति जताई और कहा कि ये अभूतपूर्व स्थिति है.

चुनाव आयोग के पत्र के बाद राष्ट्रपति ने इसे प्रधानमंत्री के पास भेजा. सलमान खुर्शीद की प्रधानमंत्री से मुलाकात भी हुई और कांग्रेस पार्टी ने भी ये बयान दिया कि संवैधानिक संस्था का सम्मान किया जाना चाहिए.

इसके बाद चुनाव आयोग को खुर्शीद ने अपना स्पष्टीकरण भी भेजा था और दोहराया था कि वे चुनाव आयोग जैसी संविधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं.

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