'पति का नाम जोड़ना जरूरी' नहीं

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Image caption अदालती कार्यवाही में महिलाओं को पति का नाम जोड़ना पड़ता था

अब महाराष्ट्र में महिलाएं शादी से पहले का नाम रख सकेंगी और उन्हें शादी के बाद अपने नाम के साथ पति का नाम जोड़ना जरूरी नहीं होगा.

बॉंबे हाई कोर्ट ने कुछ दिनों पहले फैमिली कोर्ट्स एक्ट के तहत एक अहम नियम में संशोधन किया है जिससे शादी संबंधी किसी भी कार्यवाही में महिलाओं को पति का नाम जोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता.

इस संशोधन से उन महिलाओं को खासकर आराम पंहुचेगा जो तलाक चाहती हैं लेकिन अदालत में कोई भी कार्यवाही करने के लिए उन्हें अपने नाम के साथ पति का नाम लेना पड़ता था.

कानून विशेषज्ञों का कहना है कि इस संशोधन से दूसरी अदालतों में भी महिलाओं को शादी से पहले का नाम इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है.

इस कानून के मुताबिक 'पत्नी जिसने शादी के बाद अपना नाम आधिकारिक गजट में नहीं बदलवाया है, वो शादी से पहले का नाम शादी के बाद भी रख सकती हैं.'

नाम बदलने पर मजबूर नहीं

इससे पहले महाराष्ट्र की अदालतों में किसी शादीशुदा महिला की अर्जी तब तक नहीं स्वीकार की जाती थी जब तक वो अपने पहले नाम के बाद अपने पति का नाम और फिर उसका उपनाम नहीं जोड़ती थी. चाहे महिलाएं तलाक के लिए अदालत गई हों या फिर घरेलू हिंसा के लिए उन्हें ऐसा करना ही पड़ता था.

लेकिन अब ये नियम खत्म कर दिया गया है. कई महिलाएं जो शादी के बाद भी अपना पहले वाला नाम इस्तेमाल करना चाहती हैं उन्हें भी आसानी होगी.

लेकिन अगर महिलाएं तलाक के बाद अपने नाम के साथ पति का नाम जोड़े रखना चाहेगी तो वो भी संभव होगा जबतक अदालत को ये न लगे कि ऐसा किसी धोखाधड़ी या जालसाजी के लिए किया जा रहा है.

दरअसल ये प्रावधान पिछले साल नवंबर में ही आधिकारिक गजट में छप गया था लेकिन लोगों कि नजरों में नहीं आया था.

इस नए कानून का महिला अधिकार के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं और वकीलों ने स्वागत किया है.

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