भट्टा-पारसौल: चुनाव से ज्यादा अस्तित्व बचाने की लड़ाई

  • 28 फरवरी 2012
नूतन तेवतिया
Image caption नूतन तेवतिया ने अपने पति के चुनाव प्रचार का ज़िम्मा संभाल रखा है

दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के करीब बसा भट्टा-पारसौल गाँव भारत के उन हजारों गाँवों में से एक है, जो बढ़ते शहरीकरण के कारण अपने अस्तित्व पर ख़तरा महसूस कर रहें हैं.

भट्टा गाँव का सबसे बड़ा कसूर यह है कि यह नोएडा से आगरा के लिए प्रस्तावित तेज रफ़्तार सड़क यमुना एक्सप्रेस-वे के करीब है और सरकार यहाँ की उपजाऊ जमीन बड़ी-बड़ी कॉलोनी बनाने के लिए बिल्डर्स को देना चाहती है.

गाँव के लोग विरोध स्वरूप धरना दे रहे थे जिसे समाप्त कराने के लिए प्रशासन ने पुलिस फ़ोर्स लेकर धावा बोल दिया था.

तेईस साल के युवक कपिल गाँव के उन तमाम लोगों में से एक हैं, जो पिछले साल सात मई को धरनास्थल पर पुलिस फायरिंग में घायल हुए थे. कपिल ने मुझे वह जगह दिखाई जहाँ पुलिस (पीएसी) ने धरना दे रहे किसानों पर धावा बोला था. कपिल को भी दो गोलियाँ लगी थीं, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें बचा लिया.

कपिल के परिवार और गाँव के नौ लोग अब भी जेल में हैं. इन किसानों के नेता मनवीर सिंह तेवतिया जेल से ही विधान विधान सभा चुनाव लड़ रहें हैं. शरद यादव के जनता दल (यू) ने तेवतिया को अपना प्रत्याशी बनाया है.

उम्मीदवार

जेवर विधान सभा क्षेत्र से बहुजन समाज पार्टी, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी सभी ने अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं.

लेकिन भट्टा पारसौल, आछेपुर, मुतैना और उसराना गाँवों के लोगों का कहना है कि उन्हें राजनीतिक दलों के बजाय अपने किसान नेता तेवतिया पर ही भरोसा है.

बुजुर्ग किसान प्रेम पाल कहते हैं, "तेवतिया कल को अगर विधायक बन जाता है तो हमारी लड़ाई तो लड़ सकता है. नहीं तो फिर हमको तबाह कर दिया जाएगा. चाहे जो सरकार आए."

उनकी बात को आगे बढ़ाते हुए किसान अजय पाल सिंह कहते हैं, "यहाँ का कोई किसान मजदूर नहीं चाहता कि मायावती सरकार फिर से आए, क्योंकि कुशासन बहुत हुआ है और अत्याचार में कोई कमी नही रह गई है."

गाँव के लोगों ने भट्टा गाँव में तेवतिया का चुनाव कार्यालय खोल लिया है और कई बैनर भी लगाए हैं. दूसरे प्रत्याशी भी प्रचार के लिए यहाँ आए, लेकिन गाँव के लोगों ने उन पर ध्यान नहीं दिया.

मनवीर तेवतिया ने चुनाव प्रचार के लिए पैरोल पर रिहाई की मांग की थी, लेकिन पुलिस ने यह कहते हुए पैरोल का विरोध किया कि तेवतिया अपराधी और आतंकवादी हैं और उनके रिहा होने से शांतिपूर्वक चुनाव कराने में विघ्न-बाधा पड़ेगी. इसलिए चुनाव प्रचार की कमान उनकी पत्नी नूतन तेवतिया ने संभाली है.

वे कहती हैं, "मैं कहती हूँ कि तेवतिया जी ने आपके लिए संघर्ष किया. मैं तो केवल उनकी दूत हूँ. तेवतिया जी जेल में हैं, इसलिए अपनी बात भी नहीं कह पा रहें हैं. उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा कहाँ हो रही है."

नूतन का कहना है कि जिस दिन तेवतिया अपना नामांकन करने आए थे, उसी दिन पुलिस ने उनके पिता को पकड़ कर कई घंटे हिरासत में रखा, ताकि वह नामांकन ही न कर पाएँ.

जेवर विधान सभा ग्रामीण क्षेत्र है, जिसमें दो सौ अस्सी गाँव और दो लाख अस्सी हजार मतदाता हैं. राजनीतिक दलों के मुकाबले न तो उनके पास कार्यकर्ता हैं और न ही धन या दूसरे साधन.

अपील

यहाँ तक कि चुनाव अपील का कोई पर्चा भी वह नहीं छपवा सकीं. नूतन सुबह सात बजे ही प्रचार के लिए निकल जाती हैं. वह पैदल ही एक गाँव से दूसरे गाँवों घूमती हैं. दिल्ली और हरियाणा के कई किसान नेता तेवतिया का प्रचार करने आए हैं.

Image caption गाँव में तेवतिया का कार्यालय भी बना हुआ है

दिल्ली से आए किसान नेता मास्टर मान सिंह भट्टा में हुई पुलिस फायरिंग, आगजनी और महिलाओं पर अत्याचार की तुलना जालियांवाला बाग कांड से करते हैं.

वे कहते हैं, "हमारे बेकसूर लोगों पर फायरिंग हुई. फिर उनको फर्जी हथियार लगाकर जेल में डाल दिया गया. दुख होता है कि किसानों के साथ डकैतों जैसा व्यवहार किया गया."

चुनाव का परिणाम क्या होगा, यह पूछने पर नूतन कहती हैं, "चुनाव में कोशिश पूरी की है लेकिन अब ये जनता पर है कि वो क्या निर्णय लेते हैं."

नूतन के लिए केवल जीत-हार की बात महत्वपूर्ण नहीं है, यह चुनाव शायद उनके लिए अपने परिवार के अस्तित्व को बचाने की भी लड़ाई है.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार