नॉर्वे से बच्चों के लौटने का रास्ता साफ

  • 29 फरवरी 2012
भारतीय दंपति के बच्चे इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption शिकायतों के बाद अधिकारियों ने भारतीय दंपत्ति से बच्चे ले लिए थे

नॉर्वे की बाल कल्याण एजेंसी ने कहा है कि भारतीय दंपति के बच्चों को उनके चाचा को दिया जा सकता है.

स्टावेंजर चाइल्ड वेलफेयर सर्विस (सीडब्लूएस) ने अपने एक बयान में कहा है कि चाचा को बच्चे सौंपे जाने के बाद वे भारत लौट सकते हैं.

हालांकि इस बयान में ये भी कहा गया है कि अंतिम फैसला अदालत मार्च में लेगी. अदालत ने इस मामले की सुनवाई के लिए 23 मार्च की तारीख तय कर रखी है.

तीन और एक वर्ष के इन बच्चों को इन आरोपों के बाद उनके माता पिता से अलग कर दिया गया था कि वे बच्चों की ठीक तरह से देखभाल नहीं कर पा रहे हैं.

इस मामले को लेकर भारत सरकार ने भी अपनी ओर से प्रयास किए थे और नॉर्वे में अपना एक विशेष दूत भी भेजा था.

दूसरी ओर इन बच्चों के परिजनों ने सोमवार को नॉर्वे के दूतावास के सामने धरना भी दिया था.

वापसी का रास्ता साफ

सीडब्लूएस ने कहा है कि दो भारतीय बच्चों के मामले में उनके पिता के भाई से बातचीत पूरी हो गई है.

संस्था ने कहा है, "ये तय किया गया है कि इन दोनों बच्चों को उनके पिता के भाई को दे दिया जाए और वह इन बच्चों को वापस भारत ले जा सकते हैं."

संस्था का कहना है कि यह बच्चों के हित में था कि पहले कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए.

इससे पहले भारत सरकार ने कहा था कि बच्चे अपने सांस्कृतिक माहौल में पले-बढ़ें इसके लिए जरुरी है कि जितनी जल्दी हो सके उन्हें भारत लाने की अनुमति दी जाए.

बच्चों के पिता अनुरूप भट्टाचार्य और सागरिका भट्टाचार्य ने कहा है कि जहाँ तक बच्चों को अपने साथ सुलाने और हाथ से खाना खिलाने का मामला है, तो अधिकारियों को नॉर्वे और भारत की सांस्कृतिक अंतर को ध्यान में रखना चाहिए.

हाल ही में उन्हें अनुमति दी गई है कि वे सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में अपने बच्चों से मिल सकते हैं.

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