जगन के समर्थक 16 विधायक अयोग्य घोषित

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Image caption आंध्रा के कुछ बागी विधायक जिन्हें अयोग्य घोषित किया गया

एक महत्वपूर्ण राजनैतिक घटना में आंध्र प्रदेश विधान सभा स्पीकर नंदेंडला मनोहर ने उन 16 बागी कांग्रेस विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया है जो वाईएसआर कांग्रेस के अध्यक्ष वाईएस जगन्मोहन रेड्डी का समर्थन कर रहे थे.

साथ ही उन्होंने प्रजा राज्यम पार्टी की एक विधायिका शोभा नागी रेड्डी का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया है जो जगन्मोहन रेड्डी की पार्टी में शामिल हो गई थीं.

आंध्र प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है कि इतने सारे विधायकों को एक साथ अयोग्य घोषित कर दिया गया है.

वैसे तो इन विधायकों के विरुद्ध कारवाई पिछले तीन महीनों से चल रही थी लकिन उनको अयोग्य घोषित करने की घोषणा शुक्रवार देर रात की गई.

पिछले पांच दिसंबर को इन बागी कांग्रेसी विधायकों ने पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करते हुए अपनी सरकार के खिलाफ तेलुगु देसम पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया था.

उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने स्पीकर से अनुरोध किया था कि वो इन विधायकों की सदस्यता को बर्खास्त कर दें.

उपचुनाव

हालांकि स्पीकर ने इन विधायकों को कई बार नोटिस जारी किया और उनसे स्पष्टीकरण मांगा.

लेकिन इन विधायकों ने अलग अलग आकर कोई स्पष्टिकरण देने से इनकार कर दिया और कहा कि स्पीकर को सब कुछ मालूम है और वो जो चाहे करवाई कर सकते हैं.

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Image caption बागी विधायकों ने जगन्नमोहन का समर्थन किया था

जिन विधायकों को अयोग्य घोषित किय गया है उनमें दो पूर्व मंत्री पिल्ली सुभाष चन्द्र बोसे, बी श्रीनिवास रेड्डी के साथ अमरनाथ रेड्डी, श्रीकांत रेड्डी, धर्मना कृष्ण दास, जी बाबु राव, बी गुरुनाथ रेड्डी, चेन्ना केशव रेड्डी, एम प्रसाद बाबु, एम सुनीता, के श्रीनिवासुलु, पी रामकृष्ण रेड्डी, टी बलारजू, के रामचंद्र रेड्डी और कोंडा सुरेख शामिल हैं. कोंडा सुरेख को छोड़ कर सब का संबंध आंध्र और रायलसीमा क्षेत्र से है.

इस तरह अब राज्य में एक साथ 17 विधान सभा सीटों और एक लोक सभा सीट के लिए उप चुनाव का रास्ता साफ़ हो गया है.

इससे पहले लोक सभा स्पीकर ने जगन्मोहन रेड्डी का समर्थन करने वाले कूर्नूल के सांसद राजमोहन रेड्डी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया था.

यह उप-चुनाव छह महीने के अन्दर होंगे.

कांग्रेस की रणनीति

वैसे इस वक़्त भी आंध्र प्रदेश में साठ विधान सभा सीटों के लिए उप-चुनाव का अभियान चल रहा है और इनमें से अधिकतर सीटें तेलंगाना प्रान्त में हैं और यह चुनाव तेलंगाना राज्य के विषय पर लादे जा रहे हैं.

इस तरह कांग्रेस पार्टी अपनी इस रणनीति में तो सफल रही है कि एक साथ चौबीस विधान सभा सीटों के लिए चुनाव न हों. इसी रणनीति के तहत उस ने बागी विधायकों को अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई में देरी की थी.

अगले उप-चुनाव जब भी होंगे ऐसा माना जा रहा है कि उसमें असल मुकाबला कांग्रेस पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के बीच होगा और इसके परिणाम यह साबित कर देंगे कि जगन्मोहन रेड्डी की शक्ति कितनी है और वो कांग्रेस को कहां तक नुकसान पहुंचा सकते हैं.

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