उत्तर प्रदेश चुनाव: समाजवादी पार्टी को स्पष्ट बहुमत

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Image caption समाजवादी पार्टी के नेताओं ने साफ़ कर दिया है कि मुलायम सिंह ही मुख्यमंत्री होंगे

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिल गया है.224 सीटों पर समाजवादी पार्टी को जीत हासिल हुई है जबकि बहुमत के लिए उसे 202 सीटों की दरकार थी.

बहुजन समाज पार्टी ने 79 सीटें जीती हैं, जबकि 47 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी ने सफलता हासिल की है. कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल को कुल मिलाकर 38 सीटें मिली हैं. उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं.

मंगलवार रात को उत्तरप्रदेश में झांसी समेत कुछ जगहों पर पत्रकारों पर हमले की ख़बरे आईं. रिपोर्टों के मुताबिक इसमें सपा के कार्यकर्ता शामिल थे. बाद में अखिलेश यादव ने बयान जारी कर कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्ती से पेश आना चाहिए.

तस्वीरों में: उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल

जश्न और मायूसी

मंगलवार सुबह जब शुरुआती दौर में रुझान आने शुरु हुए थे तभी से समाजवादी पार्टी ने बढ़त बनाई हुई थी जो लगातार बढ़ती गई.

चुनाव विश्लेषकों को अनुमान था कि समाजवादी पार्टी सबसे बड़े दल के रुप में उभरेगी लेकिन किसी को ये अनुमान नहीं था कि वह पिछली बार बहुजन समाज पार्टी को मिली जीत से आगे निकल जाएगी.

धीरे-धीरे जब परिणाम आने लगे तो ये चर्चा अपने आप बंद हो गई कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस का समर्थन लेना चाहेगी या नहीं या कांग्रेस सपा को समर्थन देना चाहेगी या नहीं.

अब सपा अपने दम पर सरकार बनाने जा रही है.

पूरे प्रदेश में इन परिणामों ने सपा कार्यकर्ताओं को खुशी से भर दिया है और वे सड़कों पर दिन भर जश्न मनाते हुए दिखे. पटाखे फोड़कर और नाच-गाकर.

अब सपा को मुख्यमंत्री चुनने की औपचारिकता पूरी करनी है. और इसके लिए अखिलेश यादव ने स्पष्ट ही कर दिया है कि मुलायम सिंह यादव ही मुख्यमंत्री बनेंगे.

लेकिन दूसरी ओर इन परिणामों ने सत्तारुढ़ रहे बसपा, बड़ी उम्मीद लगाए बैठी भाजपा और सबसे कांग्रेस को निराशा हुई.

मायावती की चुप्पी

बीबीसी संवाददाता रामदत्त त्रिपाठी के मुताबिक मुख्यमंत्री मायावती की खामोशी से राजनीतिक हलकों और राजभवन में हैरानी है.

सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार के अनुसार सत्ताधारी पार्टी के चुनाव में हारते ही मुख्यमंत्री अपने पद से त्यागपत्र दे देता है. इसके बाद राज भवन विधान सभा को भंग करके नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू करते हैं.

लेकिन राज भवन अधिकारियों का कहना है कि शाम छह बजे तक मुख्यमंत्री मायावती ने राज भवन से संपर्क नहीं किया.

पहले बहुजन समाज पार्टी कार्यालय से बताया गया था कि मुख्यमंत्री ने शाम साढ़े तीन बजे गवर्नर से मिलने का समय माँगा था.

गवर्नर तीन बजे के करीब बरेली से लौट आए, लेकिन मायावती न उनसे मिलने आईं और न कोई संदेश आया.

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Image caption मायावती और उनके दल के नेता दिन भर कहीं दिखाई नहीं पड़े

इससे पहले राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा था कि चूँकि वर्तमान विधान सभा का कार्यकाल 18 मई तक है. इसलिए मायावती हार के बावजूद तब तक सरकार चला सकती हैं.

लेकिन विधान सभा सचिवालय में जानकार लोगों का कहना है कि राज्य सभा चुनाव की अधिसूचना जारी हो चुकी है. इसलिए 30 मार्च से पहले विधान सभा भंग करनी ही होगी.

इन राज्यों के नतीजों को वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों के लिहाज से अहम माना जा रहा है.

वर्ष 2007 में हुए विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी ने 403 में से सबसे ज्यादा 206, समाजवादी पार्टी ने 97, भाजपा ने 51 और कांग्रेस ने 22 सीटें जीती थीं.

राष्ट्रीय लोकदल को जहां 17 सीटें मिली थीं वहीं दस सीटों पर अन्य दलों के उम्मीदवार जीते थे.

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