अनुशासन दिखाएं तभी तो कुछ बन सकते हैं: मुलायम

Image caption उत्तरप्रदेश के नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण सोमवार बारह मार्च को प्रस्तावित है

उत्तरप्रदेश विधानसभा के लिए मतगणना के दौरान झांसी में मीडियाकर्मियों पर हमले की घटना के सिलसिले में समाजवादी पार्टी के एक नेता और उनके समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.

वहीं राज्य के फिरोजाबाद जिले में मंगलवार को मतगणना के बाद समाजवादी पार्टी उम्मीदवार के समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प में गोली लगने से घायल एक युवक की आगरा के अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, झांसी की घटना के संबंध में बबीना सीट से समाजवादी पार्टी के हारे प्रत्याशी चंद्रपाल यादव के खिलाफ एक पत्रकार की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है.

प्रशासन का कहना है कि घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान हो गई है और उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

वहीं सपा प्रमुख मुलायम सिंह ने सैफई में अपने समर्थकों से संयम बरतने का आग्रह किया है. समर्थकों ने जब उन्हें प्रधानमंत्री बनाने की बात की तो मुलायम सिंह ने कहा, ''आप अनुशासन दिखाएं तभी तो कुछ बन सकता है.''

मुख्यमंत्री पर संशय

इस बीच राज्य में सोलहवीं विधान सभा के गठन की अधिसूचना गुरुवार को जारी हो जायेगी, लेकिन नई सरकार का गठन सोमवार बारह मार्च को संभावित है.

मुख्यमंत्री पद को लेकर अभी संशय बरकरार है कि सरकार का नेतृत्व मुलायम सिंह करेंगे या अखिलेश.

भारतीय चुनाव आयोग की एक विज्ञप्ति के अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा गुरुवार को नयी विधान सभा के गठन की अधिसूचना की प्रति राज्यपाल बी एल जोशी को सौंपेंगे.

चुनाव में स्पष्ट बहुमत लेकर आई समाजवादी पार्टी ने अपने नव निर्वाचित विधायकों की बैठक दस मार्च को बुलाई है.

सपा के राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव ने सैफई में पत्रकारों से कहा कि निजी तौर उन्होंने अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन पार्टी का सामूहिक फैसला दस मार्च को हो जाएगा.

अखिलेश यादव अभी तक यही कह रहें हैं कि 'नेता जी' यानि मुलायम सिंह यादव ही मुख्यमंत्री होंगे और वह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष तथा संसद सदस्य की जिम्मेदारी निभाएंगे.

युवा कार्यकर्ताओं की मांग

पूरे प्रदेश से सैफई पहुंचे समाजवादी पार्टी के युवा कार्यकर्ता मांग कर रहें हैं कि सरकार की बागडोर अखिलेश यादव को सौंपी जाए.

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Image caption पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं की राय है कि अभी मुलायम सिंह ही मुख्यमंत्री बनें

समझा जाता है कि मुलायम सिंह यादव सैफई से लखनऊ लौटकर मोहम्मद आज़म खान, अपने छोटे भाई शिव पाल यादव और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मशविरा करने के बाद ही अंतिम निर्णय लेंगे कि वह सत्ता की बागडोर स्वयं संभालेंगे या बड़े बेटे अखिलेश को इसी समय सत्ता हस्तांतरित कर देंगे.

समझा जाता है कि अंतिम फैसला लेने से पहले उन्हें परिवार में भी सभी लोगों को विश्वास में लेना होगा ताकि आगे चलकर कोई मनमुटाव या टकराव न हो.

जानकार लोग यह भी कह रहें हैं कि डी पी यादव को पार्टी में लेने के नाम पर अखिलेश यादव ने जो सार्वजनिक तौर पर मना कर दिया था, उससे आजम खान , मोहन सिंह और शिव पाल आहत हैं.

कहा तो यह भी जा रहा है कि अगर अखिलेश मुख्यमंत्री बनते हैं तो शायद आज़म खान मंत्रिमंडल में शामिल न होना चाहें. नये मंत्रिमंडल के गठन को लेकर भी दावेदारी शुरू हो गयी है.

अखिलेश यादव ने कहा है कि साफ़ सुथरी छवि के लोग ही मंत्री बनेंगे. ऐसे में कई पुराने नेताओं को किनारे करके नये चेहरों को लाना भी सूझबूझ और कूटनीति वाला काम होगा.

समझा जाता है कि इसीलिए शपथ ग्रहण सोमवार बारह मार्च को प्रस्तावित है.

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