आईपीएस नरेंद्र कुमार की हत्या की न्यायिक जाँच

  • 9 मार्च 2012
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Image caption पर्यावरणविदों का आरोप है कि उत्खनन, राजनीतिक संरक्षण में चल रहा है.

मध्यप्रदेश के मुरैना में अवैध उत्खनन रोकने गए बानमोर के एसडीओपी नरेंद्र कुमार की हत्या के मामले में राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं.

नरेंद्र कुमार के मामले को लेकर मध्य प्रदेश में राजनीति तेज हो गई है. आईपीएस नरेंद्र कुमार की हत्या को लेकर पूरे प्रदेश में विपक्षी कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर आ गए हैं.

विपक्ष और आम लोगों की आलोचना का सामना कर रही सरकार ने वरिष्ठ आधिकारियों की बैठक बुलाकर मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सरकार किसी भी तरह से प्रदेश में माफिया राज नही चलने देगी.

अवैध उत्खनन

नरेंद्र कुमार की हत्या से एक बार फिर पता चलता है कि खदान माफियाओं का राज मध्यप्रदेश में किस कदर हावी है.

पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश का चंबल क्षेत्र अवैध उत्खनन का गढ़ बन गया है. पत्थर और रेत का अवैध उत्खनन इस क्षेत्र में आम बात है.

पर्यावरणविदों का आरोप है कि ये उत्खनन, पक्ष और विपक्ष के नेताओं और अधिकारियों के संरक्षण में चल रहा है.

पर्यावरण के लिये काम करने वाली गैर सरकारी संस्था, 'प्रयत्न' के सचिव अजय दुबे का आरोप है कि, “ये सब सरकार के संरक्षण में चल रहा है. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह नगर बुधनी में भी रेत के अवैध उत्खनन का मामला सामने आया है, मगर सरकार ने कुछ नही किया.”

वहीं गृह मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने कहा है कि, “दोषियों की किसी भी कीमत पर बख्शा नही जायेंगा. उनके खिलाफ सख्त कारवाई की जायेंगी. अभी तक जो जांच की गई है उससे पता चलता है कि ये ट्रेक्टर उसी व्यक्ति के नाम है जिसने नरेंद्र कुमार की हत्या की है लेकिन अभी ये कहना मुश्किल है कि इसके पीछे किसी माफिया का हाथ है.”

पिता का आरोप

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Image caption आईपीएस नरेंद्र कुमार की गुरुवार को मौत हो गई.

गुरुवार को आईपीएस नरेंद्र कुमार ने बामौर में अवैध रुप से पत्थर ले जा रहे एक ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की तो ड्राइवर मनोज गुर्जर ने ट्राली को इस तरह से गिरा दिया कि पत्थर उन पर आकर गिरे और उनकी मौत हो गई.

अपने पुत्र की लाश लेने के लिए ग्वालियर आये नरेंद्र कुमार के पिता केशव देव ने अब आरोप लगाया है कि उनके बेटे की हत्या करवाई गई है और इसमें राजनीतिक लोग शामिल है.

नरेन्द्र कुमार की पत्नी, मधुरानी एक आईएएस अधिकारी है. हाल ही में राजगढ़ के सीईओ के पद से उनका तबादला कर उन्हें ग्वालियर का एडीएम बना दिया गया.

अब केशव देव का आरोप है कि उनकी बहू का तबादला राजनीतिक दबाव में किया गया और इसके पीछे एक विधायक का हाथ था.

'बेल्लारी से बड़ा घोटाला'

अवैध उत्खनन इस कदर बढ़ चुका है कि पिछले साल मध्यप्रदेश के दौरे में आये जनता दल(यू) के अध्यक्ष शरद यादव ने स्वंय स्वीकार किया था कि अगर अवैध उत्खनन के मामलों की जांच की जायें तो 'बेल्लारी से भी बड़ा मामला' सामने आ सकता है.

चंबल क्षेत्र में रेत के अवैध उत्खनन के चलते क्षेत्र में जलीय प्रजातियों के लिये संकट खड़ा हो गया है. मुरैना में राष्ट्रीय घड़ियाल अभ्यारण्य है, जहां रेत के अवैध उत्खनन की वजह से घड़ियालों के लिये संकट पैदा हो रहा है.

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अवैध उत्खनन के मामलों को देखते हुए सरकार को कारवाई के निर्देश दिये थे. इसके बाद सरकार ने 15 दिसंबर से 15 जनवरी तक एक माह के लिये अभियान भी चलाया था.

खदान माफिया के हौसले का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि अभियान के दौरान 17 दिसंबर को रेत माफिया ने वन और खनिज विभाग के अधिकारियों पर हमला बोल दिया. जिसमें कुछ कर्मचारी घायल भी हुये थे. इसके बाद ये अभियान धीमा पड़ गया.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक इस हादसे की बाद भी स्थिति बदलने की कम ही उम्मीद है.

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