सोशल साइट्स पर 'नीरस' प्रधानमंत्री

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Image caption शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कार्यालय उनके मनरेगा पर एक भाषण के साथ यू टयूब पर आ गया.

सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर आने के करीब दो महीनों के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अब वीडियो लोड करने वाली साइट यू-टयूब पर भी आ गए हैं.

जहां यह माना जा रहा है कि आज के बदलते दौर में सोशल वेबसाइट पर प्रधानमंत्री कार्यालय का होना जरूरी हो गया है, वहीं ऐसी धारणा भी है कि पीएमओ का ट्विटर अकाउंट कुछ नीरस है.

शनिवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कार्यालय मनरेगा पर उनके एक भाषण के साथ यू टयूब पर भी आ गया है. रविवार को भी एक वीडियो इस पर डाला गया.

लेकिन सवाल यह है कि क्या यू-टयूब भी प्रधानमंत्री के ट्विटर अकाउंट की तरह होगा, जिसे काफी लोग नीरस और उबाऊ मानते हैं.

सबसे 'बोरिंग'

हाल ही में पत्रिका 'न्यूजवीक' ने उनके ट्वीट को इतिहास का सबसे बोरिंग यानी उबाऊ कह कर छापा, तो भारत की पत्रिका आउटलुक ने भी सवाल किया कि क्या उनके नए मीडिया सलाहकार का बेहतरीन प्रदर्शन यही है.

प्रधानमंत्री के ट्विटर अकाउंट पर नजर डालें, तो उनके 63,000 से अधिक फॉलोअर हैं, हालांकि इसी साल 23 जनवरी को ही वे ट्विटर पर आए थे.

वह खुद 12 लोगों को फॉलो करते हैं, जिनमें व्हाइट हाउस, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री और रूस के राष्ट्रपति शामिल हैं.

अब तक उन्होंने 177 ट्वीट किए हैं. सोमवार को जब राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल अपना भाषण दे रही थी, तो पीएमओ ट्विटर पर लगातार अपडेट कर रहे थे. एक ही दिन में उन्होंने 15 बार ट्वीट किया जो सभी राष्ट्रपति के भाषण पर आधारित थे.

लेकिन अधिकतर ट्वीट इस तरह की सरकारी जानकारी से अधिक कुछ नहीं है कि वो किससे मिले और उन्होंने कहाँ भाषण दिया.

बराक ओबामा

भारत के प्रधानमंत्री की तरह बहुत सारे देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के भी ट्विटर अकाउंट हैं.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के तो एक करोड़ से अधिक फॉलोअर हैं लेकिन उनके और मनमोहन सिंह के अकाउंट में एक खास फर्क यह है कि वो बीच-बीच में खुद भी टेवीट करते रहते हैं जिनके अंत में वो 'बीओ' यानी बराक ओबामा लिखते हैं.

वरिष्ट पत्रकार नीरजा चौधरी कहती हैं, ''यह लोगों से संपर्क रखने का बहुत ही निजी माध्यम है. बीच-बीच में आपको इसे खुद करना होगा, अपनी टीम पर नहीं छोड़ सकते. तभी तो उनके ट्वीट के बारे में कहा जाता है सरकारी जानकारी है और तस्वीरें हैं. इसलिए इसे बोरिंग माना जा रहा है.''

उन्होंने कहा, ''सोशल वेबसाइटस का मकसद है कि आप अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच पाएं और साथ ही लोगों की प्रतिक्रया भी आपको मिले.''

हालांकि उनके आलोचक यह भी मानते हैं कि अभी शुरुआत है और उन्हें थोड़ा और वक्त देना होगा.

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