प्रिय वित्तमंत्री जी

प्रिय वित्तमंत्री जी,

सरकार और संगठन दोनों की स्थिति ठीक नहीं है और पाँच राज्यों के चुनाव के परिणाम बताते हैं कि जनता कांग्रेस के साथ नहीं है.

ऐसी स्थिति में आपका बजट सत्ता और संगठन को नई दिशा और दशा दे सकता है. इसलिए मेरी ऐसी मान्यता है कि आपको अपने बजट में आम आदमी के बारे में सोचना चाहिए.

नरेगा भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बन गया है.

सुनिए: प्रिय वित्तमंत्री जी

बुज़ुर्गों, ग़रीबों और महिलाओं के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही है, इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि आप समाज के इन तीन उपेक्षित वर्गों की ओर ध्यान दें.

इसी प्रकार मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ कि सरकार में फ़िज़ूलखर्जी बहुत बढ़ गई है. राज्यमंत्री और समकक्ष पद जनता पर भार है. उनके पास कोई कामकाज नहीं होता. इसलिए प्रशासनिक सुधार का काम यहीं से शुरु होना चाहिए. कैबिनेट से बाहर भी बहुत से लोगों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जाता है, ये भी जनता पर भार है और इसकी आवश्यकता मुझे महसूस नहीं होती.

इसी प्रकार एमपी फंड अब पाँच करोड़ का हो गया है. यानी पाँच साल में एक एमपी को पच्चीस करोड़ रुपए मिलते हैं. इन पच्चीस करोड़ रुपयों में से कितना पैसा सही रुप में खर्च होता है, इसे कोई नहीं जानता. ये राशि कहाँ जाती है, इसका भी पता नहीं चलता. इस फंड को अब रोक दिया जाना चाहिए.

महिलाओं और नवशिशुओं की मृत्यु दर की ओर भी ध्यान दिए जाने की ज़रुरत है. किसान आत्महत्या करें ये हमारे लिए अत्यंत ही दुख की बात है.

वित्तमंत्री जी, आपको सरकार और जनता ने एक बहुत बड़ा मौक़ा दिया है. आप चाहें तो जनता को कुछ सुख दे सकते हैं और उनको भी सामान्य स्थिति में ला सकते हैं. आपका बजट कॉर्पोरेट बजट न हो, रक्षा खर्च को कम करने का प्रयास किया जाए, ऐसी मेरी मान्यता है.

मैं हूँ आपका,

यशवंत कोठारी

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