दिनेश त्रिवेदी को लेकर राजनीतिक खींचतान जारी

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Image caption दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि ममता बनर्जी पत्र लिखकर कहें तो वे इस्तीफ़ा दे देंगे

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर दोहराया कि अब प्रधानमंत्री को दिनेश त्रिवेदी को रेलमंत्री के पद से हटाकर मुकुल राय को ये पद दे देना चाहिए.

कोलकाता में राज्यसभा की सदस्यता के लिए मुकुल राय और तीन अन्य सदस्यों के नामांकन के अवसर पर उन्होंने कहा, "जो मुझे कहना था, मैं पहले ही कह चुकी हूँ. अब फ़ैसला सरकार को करना है. रेलमंत्री के लिए मुकुल राय उम्मीदवार हैं."

हालांकि उन्होंने दिनेश त्रिवेदी के ताज़ा बयान पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

ममता बनर्जी का ये बयान दिनेश त्रिवेदी के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्हें इस्तीफ़ा देने के लिए न तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनसे इस्तीफ़ा देने को कहा है और न ममता बनर्जी ने. उन्होंने ये भी जानना चाहा है कि आखिर इस्तीफ़ा देने की क्या वजह है.

इससे पहले लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक कल्याण बनर्जी ने फ़ोन पर दिनेश त्रिवेदी से बात की थी और इस्तीफ़ा देने को कहा था.

गत 14 मार्च को दिनेश त्रिवेदी ने रेल बजट पेश करते हुए यात्री भाड़े में बढ़ोत्तरी की घोषणा की थी और इसके बाद से ही तृणमूल कांग्रेस ने नाराज़गी जताई थी और ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को फ़ैक्स भेजकर कहा था कि वे दिनेश त्रिवेदी को पद से हटाकर मुकुल राय को ये पद दे दें.

ख़बरें थीं कि प्रधानमंत्री ने ममता बनर्जी को आश्वासन दिया था कि वे आम बजट के बाद दिनेश त्रिवेदी को पद से हटा देंगे.

मुकुल राय की तारीफ़

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Image caption ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को फ़ैक्स भेज कर दिनेश त्रिवेदी को हटाने को कहा था

जब ममता बनर्जी से कल्याण बनर्जी और दिनेश त्रिवेदी के बीच हुई बातचीत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, "कल्याण बनर्जी से ही पूछिए वो लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक हैं."

उन्होंने मुकुल राय को दूसरी बार राज्यसभा में भेजे जाने के अपने निर्णय के बारे में कहा कि मुकुल राय पार्टी के 'निष्ठावान सिपाही' हैं.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "वो पार्टी के निष्ठावान सिपाही हैं. उन्होंने राज्यसभा में छह वर्ष का कार्यकाल पूरा किया और हमने उन्हें दूसरी बार नामांकित किया है. वो हमारी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव भी हैं."

उन्होंने राज्यसभा की सीट के लिए कांग्रेस के उम्मीदवार को समर्थन न देने के अपने फैसले का भी बचाव किया.

क्यों दूं इस्तीफ़ा: त्रिवेदी

दिनेश त्रिवेदी ने शनिवार को एक बार फिर अपनी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के उस आदेश को मानने से इनकार कर दिया, जिसमें उनसे इस्तीफ़ा देने को कहा गया था.

उन्होंने पलटकर जवाब दे दिया है कि वे उसी सूरत में इस्तीफ़ा देंगे जब पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी लिखित में उनसे इस्तीफ़ा मांगें या फिर प्रधानमंत्री इस्तीफ़ा देने को कहें.

बीबीसी संवाददाता राजेश जोशी से हुई बातचीत में उन्होंने कहा, "मुझे वजह भी पता चले कि मुझे इस्तीफ़ा क्यों देना है."

सुनिए: दिनेश त्रिवेदी से बातचीत

ख़बरें हैं कि कल्याण बनर्जी ने दिनेश त्रिवेदी से इस्तीफ़ा देने को कहा है. कल्याण बनर्जी ने उनसे कहा कि वे सम्मानपूर्वक ढंग से पद से हट जाएँ जिससे कि उनको बर्खास्त किए जाने का इंतज़ार न करें.

उन्होंने कहा, "न तो मुझे प्रधानमंत्री ने इस्तीफ़ा देने को कहा है और न ममता बनर्जी ने. सुदीप बंदोपाध्याय ने लोकसभा में कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने मेरा इस्तीफ़ा नहीं मांगा है. मैं पूछना चाहता हूँ कि आखिर वजह क्या है, मैं क्यों इस्तीफ़ा दे दूँ?"

इस सवाल पर कि उनके और मंमता बनर्जी के बीच कड़ुवाहट की वजह रेल बजट ही है या फिर और कोई और वजह है, उन्होंने कहा, "मैं व्यक्तिगत कारणों में जाना नहीं चाहता. मैंने रेल बजट पेश किया है और अभी उसे पारित करवाना है."

उन्होंने दोहराया कि रेल मंत्रालय किसी एक पार्टी की संपत्ति नहीं है और न एक व्यक्ति की.

ये पूछे जाने पर कि अगर ममता बनर्जी ने उन्हें मंत्री बनाया था तो वे उनके कहने पर इस्तीफ़ा क्यों नहीं दे रहे हैं, उन्होंने कहा, "मैं ईश्वर, कुदरत और भगवान की मर्ज़ी से मंत्री बना हूँ."

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार तृणमूल कांग्रेस के मुख्य सचेतक बनर्जी ने दिनेश त्रिवेदी से हुई बातचीत में कहा है कि ये ठीक नहीं है कि वे लिखित आदेश के लिए ज़ोर डालें. उन्होंने कहा कि जब उन्हें मंत्री बनाया गया था तब तो उन्होंने लिखित आदेश का आग्रह नहीं किया था.

बनर्जी ने कहा है कि पार्टी के सदस्य के रूप में परिस्थितियों को समझना चाहिए और इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.

पीटीआई के अनुसार उन्होंने कहा, "आपने मंत्रिपद की शपथ ली क्योंकि पार्टी ऐसा चाहती थी. अब पार्टी चाहती तो आपको इस्तीफ़ा दे देना चाहिए."

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