क्या होगा नसीमुद्दीन सिद्दीकी का?

  • 17 मार्च 2012
मायावती
Image caption सिद्दीकी मायावती के सबसे अधिक विश्वासपात्र हैं

बहुजन समाज पार्टी के सत्ता से हटते ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और माया सरकार के सबसे शक्तिशाली मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी की मुसीबतें बढ़ गई हैं.

लोक आयुक्त जस्टिस एनके मेहरोत्रा ने अब राज्य के नए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र भेजकर सिद्दीकी के कथित भ्रष्टाचार के मामलों की सीबीआई जांच की सिफारिश दोहरायी है.

इससे पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने लोक आयुक्त की यह सिफारिश ठुकरा दी थी. मायावती ने कहा था कि सीबीआई जांच की सिफारिश लोक आयुक्त के क्षेत्राधिकार से बाहर है.

मायावती ने लोक आयुक्त की सिफारिश पर कई मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था. सिद्दीकी उनके सबसे अधिक विश्वासपात्र हैं और कुछ लोगों का कहना है कि वे मायावती के बहुत से गोपनीय राज भी जानते हैं, इसलिए उन पर आंच नही आई.

लोक आयुक्त कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि जस्टिस मेहरोत्रा ने सात पेज का पत्र भेजकर कहा है कि उन्हें मंत्री के खिलाफ जांच करके कार्रवाई की सिफारिश करने का अधिकार है.

गंभीर आरोप

इससे पहले लोक आयुक्त ने पिछले महीने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा था कि सिदीकी और उनके परिवार के लोग बेनामी संस्थाओं के जरिए संपत्ति और जमीन जायदाद खरीदने के दोषी पाए गए हैं. सिद्दीकी और उनके परिवार के लोग यह नही बता पाए कि यह धन कहाँ से आया?

लोक आयुक्त कार्यालय के अनुसार चूँकि सिद्दीकी के खिलाफ आरोप काफी गंभीर हैं और अवैध धन संग्रह के मामले उत्तर प्रदेश से बाहर भी हुए हैं , इसलिए इनकी जांच स्थानीय एजेंसी से नही की जा सकती.

लोक आयुक्त कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री तीन महीने के अंदर सिफारिश पर अमल नही करते हैं तो राज्यपाल को विशेष रिपोर्ट भेजी जा सकती है.

सिदीकी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले स्थानीय पत्रकार जगदीश नारायण शुक्ल ने लोक आयुक्त द्वारा सिद्दीकी के खिलाफ सीबीआई जांच की दोबारा सिफारिश का स्वागत किया है.

नए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद माया सरकार के मंत्रियों द्वारा कथित भ्रष्टाचार के सवाल पर कहा था कि लोक आयुक्त कई मामलों की जांच कर रहे हैं.

इससे यह निष्कर्ष निकाला जा रहा है कि यादव लोक आयुक्त की सिफारिश को मानकर सिद्दीकी के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश कर सकते हैं.

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