कूट-कूटकर सोनिया भक्त हैं हरीश रावत: विजय बहुगुणा

Image caption उत्तराखंड में चुनावी हलचल शुरु होने से पहले ही कयास लगाए जा रहे थे कि हरीश रावत राज्य के मुख्यमंत्री बन सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस में जारी उठापटक पर बागी नेता हरीश रावत ने दोहराया है कि राज्य के मुख्यमंत्री का पद खाली नहीं है और जो समस्या पैदा हुई है, उसका समाधान पार्टी के भीतर ही खोजने की कोशिश की जा रही है.

वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का कहना है कि वो और हरीश रावत मिलकर इस बारे में तय नहीं कर सकते, दोनों के सुझाव सोनिया गांधी के पास भेजे गए हैं जिस पर वे ही मोहर लगाएंगी.

विजय बहुगुणा ने कहा, ''हरीश रावत हमारे वरिष्ठ साथी है, उनके कुछ विचार हो सकते हैं, उनकी कुछ भावनाएं हो सकती हैं, लेकिन वो कूटकूट के कांग्रेसी हैं और कूटकूट के सोनिया भक्त हैं.''

परिवार का मामला

अपनी पत्नी की राज्यसभा के लिए उम्मीदवारी की खबर को नकारते हुए हरीश रावत ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा न्याय और सामाजिक संतुलन के लिए काम किया है और उनके साथी भी यही बात कर रहे हैं.

Image caption मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को अभी राज्य विधानसभा में बहुमत साबित करना बाकी है

हरीश रावत ने कहा, ''ये सारा मामला एक परिवार के अंदर का है, ये किसी व्यक्ति के विरोध में नहीं है, किसी पर कोई आक्षेप नहीं है, हमने बस गुजारिश की है, मानना ना मानना जिनके हाथ में है, आगे उन्हें देखना है.''

उत्तराखंड की हालत का जिक्र करते हुए उन्होंने, ''राज्य के बहुत सारे सवाल हैं, पिछले 11 सालों में उत्तराखंड की जनता का विश्वास दरक रहा है और सपने बिखरते हुए लग रहे हैं.''

प्रश्नचिह्न लगाने का इरादा नहीं

नए राज्य के गठन के लिए हुए आंदोलन से अपने जुड़ाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ''मैं राज्य आंदोलन से जुड़ा रहा पर कहीं नहीं लगता कि ये एक नया राज्य है, उभरता हुआ राज्य है.''

विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बारे में हरीश रावत का कहना था, ''मैंने शुरु में ही कह दिया था कि निर्णय पार्टी का है और उस पर प्रश्न चिह्न लगाने का हमारा कोई इरादा नहीं था. लेकिन ये कहना ठीक नहीं था कि रावत के साथ कोई समर्थन नहीं है.''

उन्होंने कहा, ''हमारे दावे को खारिज करने का पार्टी के पास हमेशा अधिकार है. ये पार्टी का विशेषाधिकार है कि वो इसे माने या ना माने. मैंने इस पर कभी सवाल नहीं खडा़ किया और मैं अभी भी सवाल खड़ा नहीं कर रहा हूं.''

क्या है संकट

मूल समस्या ये है कि उत्तराखंड में मुख्यमंत्री विजय बहुगणा को लेकर कांग्रेस में अभी तक एकता नहीं हो पाई है.

हरीश रावत का खेमा बहुगुणा के खिलाफ अड़ा है वहीं दूसरी तरफ विजय बहुगुणा ने भी कह दिया कि वो किसी के दबाव में आने वाले नहीं है.

उन्होंने खुद को पार्टी की गरिमा के रक्षक के रूप में पेश किया और लड़ाई का रुख दिल्ली की ओर मोड़ दिया है.

अगर स्थिति यही रही तो 26 मार्च तक ही ये स्पष्ट हो जाएगा कि उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार रहेगी या जाएगी.

26 मार्च को विधानसभा के स्पीकर का चुनाव होगा और पार्टी इसके लिये जाहिर तौर पर व्हिप जारी करेगी. 29 मार्च को सरकार को लेखानुदान पेश करना है और ये तभी हो पाएगा जब विजय बहुगुणा के पास सदन के भीतर ज़रूरी बहुमत हो.

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