ममता की ही चली, मुकुल रॉय शपथ लेंगे

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Image caption मुकुल रॉय होंगे अगले रेल मंत्री और वह मंगलवार को शपथ लेंगे

दिनेश त्रिवेदी के रेल बजट पेश करने के बाद शुरू हुए राजनीतिक घटनाक्रम का पटाक्षेप सोमवार को हो गया जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनके इस्तीफ़े की पुष्टि की और शाम होते-होते मुकुल रॉय की बतौर रेल मंत्री घोषणा हो गई.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में चर्चा के दौरान रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी के इस्तीफे की घोषणा करते हुए अफसोस जताया और कहा कि त्रिवेदी ने ऐसा बजट पेश किया था जो पूर्व रेल मंत्री ममता बनर्जी की दृष्टि के अनुसार था.

मगर ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने रेल बजट में किरायों में बढ़ोत्तरी को ग़रीब विरोधी बताते हुए बढ़े किराए वापस लेने की माँग की है.

ममता बनर्जी ने पार्टी संसदीय दल की बैठक के बाद बताया, "मुकुल रॉय के पास फ़ोन कॉल आया था जिसमें उन्हें बताया गया है कि उन्हें बतौर रेल मंत्री मंगलवार सुबह 10 बजे शपथ लेनी है."

इससे पहले सरकार काफ़ी हो-हल्ले के बाद राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पारित कराने में क़ामयाब हो गई है.

एनसीटीसी

प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान बताया कि रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का इस्तीफ़ा उन्हें रविवार देर शाम मिला जिसे उन्होंने स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति को भेज दिया है.

प्रधानमंत्री डॉक्टर सिंह ने राष्ट्रीय आतंकवाद निरोधक केंद्र या एनसीटीसी की चर्चा करते हुए बताया कि इस बारे में प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के साथ 16 अप्रैल को एक बैठक की जाएगी.

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Image caption सरकार तृणमूल कांग्रेस के रवैये को लेकर अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चिंतित थी

मगर उनके इस आश्वासन पर विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज आश्वस्त नहीं हुईं और उन्होंने कहा कि सिर्फ़ बैठक बुलाने से कुछ नहीं होगा.

उनका कहना था कि अगर गृह मंत्री ये आश्वासन देने के लिए तैयार हैं कि मुख्यमंत्रियों की शंकाओं का समाधान करने के बाद ही एनसीटीसी लागू होगा तभी वह अपना संशोधन प्रस्ताव वापस लेंगी.

उनकी ये माँग नहीं मानी गई. इसके बाद संशोधन प्रस्ताव स्वीकार करने के पक्ष में 141 और विरोध में 226 मत पड़े.

इसके बाद विपक्षी नेता चिल्लाते सुनाई पड़े कि सरकार के पास 272 का आँकड़ा नहीं है यानी वे बहुमत से पीछे हैं.

इसके बाद वामपंथी नेताओं बासुदेव आचार्य और गुरुदास दासगुप्ता के संशोधन प्रस्ताव भी ख़ारिज हो गए.

श्रीलंका प्रस्ताव

मगर इस पूरे प्रकरण में उल्लेखनीय तृणमूल कांग्रेस सांसदों की सदन से अनुपस्थिति रही क्योंकि पार्टी सांसदों ने मतदान से अलग रहने का फ़ैसला किया.

अभिभाषण पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था के साथ ही श्रीलंका के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में अमरीका की ओर से पेश होने वाले प्रस्ताव का भी ज़िक्र किया.

उन्होंने कहा कि यूँ तो अभी अमरीकी प्रस्ताव का मसौदा सामने नहीं आया है मगर संभावना यही है कि भारत सरकार प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करेगी.

प्रस्ताव के पक्ष में मतदान का अर्थ मानवाधिकार के मामलों में श्रीलंका सरकार की आलोचना होगा और सरकार की सहयोगी द्रविड़ मुनेत्र कझ़गम यानी डीएमके भी यही चाह रही थी.

अंत में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव ध्वनि मत से पारित हो गया.

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