'एडवेंचर टूरिज्म,आदिवासियों के अधिकारों का हनन'

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उड़ीसा के कंधमाल जिले में माओवादियों द्वारा इतालवी नागरिकों पाओलो बोसुस्को और क्लौडियो कोलएंजेलो के अपहरण के बाद आदिवासी और सामाजिक हलकों में एक नयी बहस शुरू हो गयी है. यह बहस है कि सुदूर आदिवासी अंचलों में विदेशी नागरिकों के लिए 'एडवेंचर टूरिज्म' होना चाहिए या नहीं?

माओवादियों द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि दोनों इतालवी पर्यटक तालाब में नहा रहीं आदिवासी महिलाओं की तस्वीरें ले रहे थे. अभी यह साफ़ नहीं हो पाया है कि यह तस्वीरें आपत्तिजनक थीं या नहीं मगर इतना ज़रूर है कि इन पर्यटकों को इस तरह की तस्वीरें लेने की इजाज़त नहीं थी जबकि उड़ीसा की सरकार ने विदेशी पर्यटकों के आदिवासी इलाके में घूमने पर पाबंदी लगा रखी थी.

चंद रुपयों के लिए...

पुलिस का कहना है कि पाओलो बोसुस्को पिछले एक दशक से भी ज्यादा से टूर आपरेटर के रूप में काम कर रहे थे और 'उड़ीसा एडवेंचर ट्रैकिंग' नाम की संस्था चलाते थे. यह संस्था विदेशी पर्यटकों को आदिवासी बहुल इलाकों की सैर कराने का काम करती थी. हालाकि संस्था की वेबसाइट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि उनकी सोच है कि जो लोग अपने परंपरागत ढंग से रह रहे है उनकी संस्कृति से कोई छेड़-छाड़ नहीं की जाए.

वेबसाइट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि वह आदिवासियों को नाचने के लिए न विवश करते हैं और न ही किसी तरह का लोभ देते हैं. मगर सामाजिक संगठनों का आरोप है कि झारखण्ड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में बहुत सारे इलाके ऐसे हैं जहाँ आदिवासी अर्द्ध नग्न अवस्था में अपने पारंपरिक रूप में रहते आ रहे हैं. इस तरह की वेश भूषा इनकी संस्कृति का हिस्सा है.

इस मामले में भारत सरकार में आदिवासी कल्याण आयुक्त रहे सेवा निवृत आईएएस अधिकारी ब्रह्मदेव शर्मा का कहना है कि जब वह अविभाजित मध्य प्रदेश के बस्तर जिले के कलैक्टर हुआ करते थे तो उन्होंने इस तरह के पर्यटन पर रोक लगा दी थी.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "जब मैं वहां कलैक्टर के रूप में पहुंचा तो ऐसी स्थिति हो गयी थी कि आदिवासी लड़के और लड़कियां सेठों के यहां चंद रुपयों और शराब के लिए नाचा गाया करते थे."

आदिवासियों को देखने की होड़

शर्मा का कहना है कि बस्तर के आदिवासी बहुल इलाके में भी पर्यटक इसलिए आते थे क्योंकि वहां आदिवासी कम कपडे़ पहना करते थे.

वो कहते हैं. "यही वह वक़्त था कि मैंने पर्यटकों के आने पर प्रतिबन्ध लगा दिया था. अब अगर आदिवासी कम कपडे पहनते थे तो यह उनकी संस्कृति का हिस्सा है. यह कोई लुत्फ़ लेने की चीज़ नहीं है. मुझे याद आ रहा है एक बार मैं अबूझ माड़ के इलाके के सुदूर आदिवासी इलाकों में लड़कियों के लिए ब्लाऊज और लड़कों के लिए धोती लेकर गया था. अगले दिन सुबह मैंने देखा कि वह ब्लाऊज लड़कों ने पहन रखे थे."

शर्मा का कहना है कि चूँकि आदिवासी परंपरागत ढंग से कपडे पहनने के मामले में दूसरों से अलग हैं इसलिए हमेशा से विदेशियों के बीच उनको देखने की एक होड़ से लगी रहती थी.

वहीं उड़ीसा के मयुरभंज से भारतीय जनता पार्टी के सांसद रहे सालखन मुर्मू का मानना है कि आदिवासी बहुल इलाकों में एडवेंचर टूरिज्म जनजातियों के मानव आधिकारों का हनन है, मुर्मू, जो आदिवासी सेनेगल अभियान के अध्यक्ष भी हैं, कहते हैं कि यह एक तरह की घुस पैठ है. मुर्मू कहते हैं कि चाहे उधिशा हो या अंदमान, आदिवादियों को जंगली जानवर की तरह प्रस्तुत कर पर्यटन को बढ़ावा देकर सरकारे रूपए कमाने का काम कर रहीं हैं.

सामाजिक संगठनों नें माओवादियों से अपील की है कि वह विदेशी नागरिकों को जल्द रिहा कर दें साथ ही उनकी मांग है कि जनजातीय इलाकों में एडवेंचर टूरिज्म पर भी रोक लगनी चाहिए.

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