उत्तराखंड: रावत समर्थक बहुगुणा सरकार में

विजय बहुगुणा (फाइल फोटो)
Image caption विजय बहुगुणा मंत्रिमंडल का गठन तो हो गया है लेकिन अभी उन्हें बहुमत हासिल करना बाकी है.

कॉग्रेस आलाकमान और मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा शायद कुछ दिनों तक चैन की नींद सो पाएंगे क्योंकि आठ दिनों की बगावत और खींचतान के बाद उत्तराखण्ड में आखिरकार मंत्रिमंडल का गठन हो गया है.

कैबिनेट की कवायद आखिरी पलों तक जारी रही.

मंगलवार को शाम पांच बजे ओएनजीसी स्टोडियम में 10 लोगों को शपथ दिलाई गई.

इसमें कॉंग्रेस के छह विधायक शमिल हैं. बताया जाता है कि कॉंग्रेस के छह विधायकों में से तीन हरीश रावत के खेमे से हैं, सुरेंद्र सिंह नेगी, प्रीतम सिंह और गोविंद कुंजवाल.

इनके अलावा दो निर्दलीय विधायक हरीश दुर्गापाल और मंत्री प्रसाद नैथानी, यूकेडी (पी) के प्रीतम पंवार हैं और बीएसपी के सुरेंद्र राकेश को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई.

कॉंग्रेस के और तीन मंत्रियों में प्रदेश अक्ष्यक्ष यशपाल आर्य, इंदिरा ह्रदयेश और सतपाल महाराज की पत्नी अमृता रावत शामिल हैं.

कहा जा रहा है कि बहुगुणा और यशपाल आर्य के करीबी अपनी कथित उपेक्षा से नाराज़ हो गए हैं. हालांकि उन्हें गठबंधन धर्म का पाठ पढ़ाकर मनाने की कोशिश जारी है.

संभावना है कि उन्हें निगम,परिषद् और आयोग के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद देकर लालबत्ती से नवाजा जाएगा.

ध्यान रहे कि कॉग्रेस में तत्कालीन तिवारी सरकार में भी असंतोष को दूर करने के लिए बड़ी संख्या में लाल बत्तियां बांटी गई थीं जो बाद में तिवारी सरकार की पराजय का एक बड़ा कारण भी बना.

पिछली विधानसभा में कॉग्रेस विधायक दल के नेता रहे हरक सिंह रावत उपमुख्यमंत्री बनने की तमाम अटकलों के बीच काफी देर से शपथ ग्रहण समारोह में पंहुचे लेकिन उन्होंने समारोह से एक निश्चित दूरी बनाए रखी.

बाद में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, “माननीय विजय बहुगुणा और हरीश रावत मुझे सरकार में शामिल होने के लिए कह रहे हैं. अभी बातचीत चल रही है. जो होगा सबके हित में होगा.”

हरीश-बहुगुणा समझौता फार्मूला

12 तारीख को विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद कॉंग्रेस में बगावत हो गई थी जब हरीश रावत ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से त्यागपत्र दे दिया और उनके समर्थक करीब 20 विधायक बहुगुणा के खिलाफ दिल्ली में डेरा डाले रहे.

ऐसा माना जा रहा है कि कॉग्रेस में टूट की आशंकाओं के बीच आखिरकार हाईकमान की मध्यस्तता से हरीश रावत और बहुगुणा के बीच छह सूत्री समझौता फार्मूला तैयार हुआ है.

इसके प्रमुख बिंदु हैं- राज्यसभा का उम्मीदवार, प्रदेश अध्यक्ष और विधानसभा अध्यक्ष हरीश रावत की पसंद का होगा.

मंत्रिमंडल में आधे लोग हरीश रावत खेमे के होंगे और चौधरी वीरेद्र सिंह जो कथित रूप से हरीश रावत के साथ हुए अन्याय के सूत्रधार हैं उन्हें पार्टी के प्रदेश प्रभारी पद से हटा दिया जाएगा.

Image caption इंदिरा ह्रदयेश ने भी काफी नाराजगी के बाद आखिरकार मंत्री पद की शपथ लेली.

इस समझौता फार्मूले की एक कड़ी सोमवार को सामने आई जब हरीश रावत के करीबी महेंद्र सिंह माहरा को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया. माहरा विधानसभा का चुनाव हार गए थे.

मंगलवार को मंत्रिमंडल के गठन में भी इस समझौते का अक्स नजर आया.

लेकिन स्पष्ट है कि इस फार्मूले पर अमल करना इतना आसान नहीं होगा.

मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण समारोह के कुछ ही समय बाद ऐसी खबरें आई कि टिहरी से निर्दलीय विधायक दिनेश धनै और कॉग्रेस के प्रभारी चौधरी वीरेंद्र सिंह के बीच हाथापाई हुई है.

दिनेश धनै बहुगुणा के करीबी हैं और टिहरी से विधायक चुनकर आए हैं. वो एकमात्र ऐसे निर्दलीय विधायक हैं जिन्हें मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है.

सवाल उठ रहा है कि आखिर ये कैसी सरकार बनी है जहां हर कदम पर अराजकता और दबाव की ऐसी राजनीति देखने में आ रही है.

बहरहाल माना जा रहा है कि बहुगुणा सरकार पर मंडरा रहा खतरा फिलहाल टल गया है और विधानसभा में बहुमत साबित करने में उन्हें कठिनाई नहीं आनी चाहिए.

लेकिन बहुगुणा की राह कांटों भरी है. वो सांसद हैं और उन्हें अभी विधानसभा चुनाव भी जीतकर आना है. देखना ये है कि कौन विधायक उनके लिए अपनी सीट खाली करता है .

दूसरे पार्टी के भीतर जिस तरह से गुटबाजी और खींचतान का शिकार होकर उनके ममेरे भाई भाजपा के खंडूरी को अपनी सीट गंवानी पड़ी उसे देखते हुए बहुगुणा को भी हर कदम फूंक-फूंककर रखना होगा.

संबंधित समाचार