गंगा का योद्धा

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Image caption डॉक्टर जीडी अग्रवाल नदियों के संरक्षण के लिए लड़ते रहे हैं.

विख्यात पर्यावरणविद और आईआईटी के पूर्व प्रोफ़ेसर डॉक्टर जीडी अग्रवाल 15 जनवरी से गंगा नदी को बचाने के लिए आमरण अनशन पर हैं. उन्हें अब दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती करवाया गया है लेकिन वहां भी उनका अनशन जारी है.

इस बीच उनके सहयोगी कार्यकर्ताओं की भारत की पर्यावरण मंत्री जयंति नटराजन से मुलाकात हुई है जिसमें उन्होंने कहा है कि ये मामला प्रधानमंत्री कार्यालय के विचाराधीन है. उधर, प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री नारायण सामी भी एम्स में डॉक्टर अग्रवाल के सहयोगियों से बात करनेवाले हैं.

पर्यावरण के मुद्दे और नदियों के संरक्षण के लिए प्रोफ़ेसर अग्रवाल की जंग बहुत पुरानी है.

साल 1932 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में जन्में डॉक्टर अग्रवाल ने शुरूआती शिक्षा स्थानीय सरकारी स्कूल में ही हुई थी. लेकिन पढ़ाई में रूचि उन्हें अमरीका तक ले गई.

उन्होंने कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय से पर्यावरणीय इंजीनियरिंग में पीएचडी की उपाधि हासिल की.

इससे पहले उन्होंने रूढ़की विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की.

लंबे समय तक डॉक्टर अग्रवाल ने आईआईटी कानपुर में सिविल और पर्यावरणीय इंजीनियरिंग के अध्यापक के तौर पर काम किया और इस विभाग के प्रमुख भी रहे. वे छात्रों के बीच काफी लोकप्रिय थे

वे केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पहले सदस्य-सचिव भी थे. इसके अलावा भी वे कई सरकारी समितियों का हिस्सा रह चुके हैं.

भागीरथी का योद्धा

जीडी अग्रवाल हमेशा से नदियों के संरक्षण के लिए संघर्ष करते रहे हैं. उन्होंने भागीरथी नदी के गंगोत्री से उत्तरकाशी तक प्राकृतिक प्रवाह में बहने देने के लिए आमरण अनशन किया था.

उनका ये अनशन 18 दिन तक चला और 30 जून 2008 को उत्तराखंड सरकार ने भागीरथी नदी पर बन रही भैरों घाटी और पाला-मनेरी जल-विद्युत परियोजनाओं को स्थगित कर दिया. साथ ही केंद्र सरकार ने भी भागीरथी के प्रवाह को बाधित ना करने का लिखित आश्वासन दिया था.

लेकिन बाद में डॉक्टर अग्रवाल ने केंद्र सरकार पर अपने लिखित आश्वासन से पलटने का आरोप लगाया और फिर से 14 जनवरी 2009 को अनशन पर बैठ गए.

वे केंद्र सरकार द्वारा लोहारीनाग-पाला जल-विद्युत परियोजना पर तुरंत प्रभाव काम स्थगित करने के लिखित आश्वासन मिलने तक अनशन पर डटे.

ख़राब सेहत के बावजूद वे 38वें दिन तक अनशन पर रहे.

गंगा के लिए जंग

गंगा के संरक्षण के मुद्दे पर जीडी अग्रवाल का मौजूदा अनशन 15 जनवरी से शुरू हुआ था. उनकी सेहत बिगड़ने के बाद उन्हें एयर ऐंबुलेंस के ज़रिए वाराणसी से दिल्ली स्थित एम्स में लाया गया है.

एम्स ले जाए जाने से पहले डॉक्टर अग्रवाल ने पत्रकारों को बताया था, “ मैं यहां तपस्या करने आया हूं. बस. मैं कोई झगड़ा करने या किसी प्रकार की हिंसा करने नहीं आया. मुझे समझ नहीं आ रहा कि सरकार मुझे यहां से क्यों ले जा रही है. वो कह रहे हैं कि मैं बीमार हूं. मैं आसमान तक घूम सकता हूं...मुझ में इतना दम है. ”

डॉक्टर अग्रवाल की मांग है कि सरकार गंगा की रक्षा के लिए इसके प्रवाह को बाधारहित किया जाए.

डॉक्टर अग्रवाल ने पिछले वर्ष 11 जून को संन्यास ग्रहण कर लिया था जिसके बाद उन्होंने अपना नाम स्वामी ज्ञानस्वरूप आनंद रख लिया था.

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