नॉर्वे मामले से सरकार ने वापस खींचे कदम

नॉर्वे
Image caption मदद के लिए भारत से नॉर्वे जाने की तैयारी करने वाले राजनयिकों ने भी यात्रा टाल दी है

नॉर्वे में भारतीय दंपत्ती के बच्चों पर अधिकार से जुड़े मामले में विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने कहा है कि दंपत्ती के बच्चों को नॉर्वे से भारत वापस लाने की कोशिशों को फिलहाल रोक दिया गया है.

उन्होंने ये बयान मीडिया में आई उन खबरों के बाद दिया गया जिसमें कहा गया था कि भारतीय दंपत्ती के बीच रिश्ते ठीक नहीं चल रहे है.

भारतीय दंपत्ती के दोनों बच्चों को पिछले साल यानी 2011 मई में बच्चों की देखरेख करने वाली एक एजेंसी के हवाले कर दिया गया था. नॉर्वे के अधिकारियों ने दंपत्ती पर आरोप लगाया था कि वो बच्चों की देखरेख ठीक से नहीं करते थे.

बच्चों के माता पिता, सागारिका और अनुरूप भट्टाचार्या ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक विभिन्नताएं होने के कारण ये स्थिति उत्पन्न हुई.

इस अदालती मामले पर नजर रखने के लिए भारत से नॉर्वे जाने की तैयारी करने वाले राजनयिकों ने भी यात्रा टाल दी है.

परनीत कौर ने कहा, “हम स्थिति पर नजर रख रहें हैं. हमने अब तक जितना अच्छा हो सकता है वो किया है. देखना ये है कि अदालत क्या निर्णय लेती है.”

'बच्चों को खतरा'

तीन साल के अभिज्ञान और एक साल की ऐश्वर्य को नॉर्वे के बच्चों की देखरेख करने वाली एक संस्था में भेज दिया गया था. नॉर्वे की बाल कल्याण संस्था को लगता था कि बच्चे अपने मां-बाप के पास खतरे में है.

हाल ही में इस बाल कल्याण एजेंसी ने कहा कि बच्चों को उनके चाचा के हवाले कर दिया जाना चाहिए.

स्टेवेंजर चाइल्ड वेल्फेयर सर्विस ने एक बयान में कहा कि ऐसा करने से बच्चे भारत भी वापस जा सकेंगे.

ये मामला भारत और नॉर्वे के बीच कूटनयिक विवाद बन गया जिसमें भारत की मांग थी कि बच्चों को अपने देश की संस्कृति और माहौल में पलने-बढ़ने का मौका दिया जाना चाहिए.

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