इतालवी नागरिकों की रिहाई में गतिरोध बरकरार

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Image caption उड़ीसा में रेत चित्रण करने वाले सुदर्शन पटनायक ने दोनों अपहृत इतालवी नागरिकों की रिहाई की अपील की है

उड़ीसा में अपहृत दो इतालवी नागरिकों की रिहाई पर बात करने की समय सीमा बुधवार शाम समाप्त होनी है मगर दोनों पक्ष मध्यस्थों के नाम पर ही सहमत नहीं हो पाए हैं.

मंगलवार शाम को घटनाक्रम तेज़ी से बढ़ा था मगर उसके बाद एक बार फिर गतिरोध जैसी स्थिति बनी हुई है.

उड़ीसा सरकार ने अपनी ओर से गृह सचिव यूएन बहेरा, पंचायती राज सचिव प्रदीप जेना और अनुसूचित जाति एवं जनजाति विकास सचिव संतोष सारंगी का नाम दिया था.

मगर उसके साथ ही उन्होंने माओवादियों की ओर से सुझाए गए तीन में से दो नाम ख़ारिज भी कर दिए. उन्होंने सीपीआई माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य नारायण सान्याल और मानवाधिकार कार्यकर्ता बिस्वप्रिय कानूनगो के साथ वार्ता करने से इनकार किया.

मुख्यमंत्री नवीन पटनायक का कहना था कि सान्याल को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई जा चुकी है इसलिए सरकार उन्हें वार्ताकार के तौर पर स्वीकार नहीं कर सकती.

कानूनगो के बारे में सरकार ने बताया कि उन्होंने ये प्रस्ताव ठुकरा दिया है.

समय सीमा

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इसके कुछ ही देर बाद माओवादियों ने दो नाम और रखे थे. इनमें से एक प्रफुल्ल सामंतरा का और दूसरा डॉक्टर बीडी शर्मा का था. उसके बाद ही माओवादियों की ओर से वार्ता के लिए निर्धारित समय सीमा आगे बढ़ाई गई.

सीपीआई माओवादी की राज्य ऑर्गनाइज़ेशन कमिटी के सचिव सब्यसाची पांडा ने ये भी स्पष्ट किया कि दोनों इतालवी बंधक नागरिक सुरक्षित हैं और उनकी देख-रेख ठीक ढंग से हो रही है.

माओवादियों की ओर से नए वार्ताकारों के नाम की घोषणा के बाद पेंच एक बार फिर सामने आया कि प्रफुल्ल सामंतरा ने मध्यस्थ बनने से इनकार कर दिया और डॉक्टर शर्मा की ओर से कोई प्रतिक्रिया ही नहीं मिली.

माओवादियों की ओर से पहले घोषित तीन वार्ताकारों में तीसरे वार्ताकार दंडपानी मोहंती ने पहले दोनों वार्ताकारों का नाम सरकार की ओर से ख़ारिज किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उनका कहना था कि ये दोनों नाम केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम् की ओर से रखे गए थे और इससे संकट हल होने की बजाए और गहरा जाएगा.

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