आदर्श सोसाइटी रक्षा मंत्रालय को सौंप दें: हाईकोर्ट

आदर्श सोसाइटी (फाइल फोटो)
Image caption आदर्श सोसाइटी घोटाले के कारण तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक चाव्हाण को इस्तीफा देना पड़ा था.

बॉम्बे हाईकोर्ट ने घोटाले से घिरी मुंबई की आदर्श सोसाइटी के सदस्यों से कहा है कि वे अपनी गलती को स्वीकार करें और बिल्डिंग को रक्षा मंत्रालय के हवाले कर दें.

गुरूवार को हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ''राष्ट्र की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है. अपनी गलती मानने और कानून के सामने घुटने टेकने में कोई हर्ज नहीं है. आपने पहले गलती की होगी लेकिन आपका ह्रदय परिवर्तन भी हो सकता है. आप ना तो हत्यारे है, ना आतंकवादी हैं और ना ही कोई पेशेवर अपराधी हैं. इस इमारत (आदर्श सोसाइटी) को रक्षा मंत्रालय को सौंप दें.''

देश की सुरक्षा को सबसे अहम करार देते हुए जस्टिस मजूमदार ने कहा, ''हमें आतंकवादी हमलों से सबक लेना चाहिए. आतंकवादी ताज होटल तक घुस आए थे. कल वो रक्षा मंत्रालय के संवेदनशील संस्थानों पर हमले कर सकते हैं. ये एक गंभीर विषय है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है.''

अदालत ने ये भी कहा कि आज के नेताओं और नौकरशाहों को महात्मा गांधी के रास्ते पर चलना चाहिए ताकि भविष्य में लोग इन राजनेताओं और अधिकारियों को याद करके कह सकें कि उन्हें अपनी गलती मानने की हिम्मत थी.

अदालत ने आदर्श सोसाइटी को बनाए जाने की अनुमति देने के लिए मुंबई की नगरपालिका बीएमसी और शहर के लिए योजना बनाने वाली संस्था एमएमआरडीए पर भी सवाल उठाते हुए कहा, ''आपने रक्षा मंत्रालय से एनओसी के लिए क्यों नहीं जोर दिया. ये जमीन रक्षा संस्थानों से बहुत करीब है. इसकी इजाजत देने से पहले अधिकारियों को सुरक्षा की दृष्टि से इसको देखना चाहिए.''

'जांच सही रास्ते पर'

अदालत ने बीएमसी और एमएमआरडीए से अगली सुनवाई के दौरान ये बताने को कहा कि क्या उन्होंने फैसला करते समय सुरक्षा को मद्देनजर रखा था. साथ ही अदालत ने रक्षा मंत्रालय से भी पूछा कि क्या मंत्रालय ने एनओसी दिया था और जिस अधिकारी ने दिया था क्या वो इसके लिए अधिकृत था.

12 मार्च की सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच में ढिलाई बरतने के लिए सीबीआई की भी खिंचाई की थी लेकिन गुरूवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई के जरिए हाल के दिनों में किए गए काम की तारीफ़ की.

सीबीआई ने इस मामले में अब तक सेना के सेवानिवृत अधिकारियों और एक मौजूदा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी समेत कुल सात लोगों को गिरफ़्तार किया है.

सीबीआई की तारीफ करते हुए जस्टिस मजूमदार ने कहा, ''अब जांच सही रास्ते पर जा रही है. सीबीआई ने अब तक जो काम किए हैं अदालत उससे संतुष्ट है और अदालत को पूरा यकीन है कि इस मामले में पूरी जांच जल्द से जल्द पूरी होगी.''

सामाजिक कार्यकर्ता सिम्प्रित सिंह और प्रवीण वातेगांवकर ने इस मामले में जनहित याचिका दायर कर अदालत से अपील की है कि अदालत आदर्श घोटाले जांच की निगरानी करे और अभियुक्तों पर मनी लॉंड्रिंग कानून भी लगाएं.

आदर्श सोसाइटी दक्षिण मुंबई के कोलाबा में स्थित 31 मंजिला इमारत है जिसे पास में मौजूद रक्षा संस्थानों के लिए खतरा माना जा रहा है. इस मामले में अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी.

आदर्श हाउसिंग सोसाइटी तब विवादों में घिर गई थी जब पता चला था कि इसकी इमारत के निर्माण में अनेक नियमों और क़ानूनों का उल्लंघन हुआ था.

यही नहीं कई प्रभावशाली अधिकारियों, सैन्य अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं के रिश्तेदारों को इस इमारत में फ़्लैट दिए गए थे.

पूरे मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा और कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस की सरकार के उस समय मुख्यमंत्री रहे अशोक चव्हाण को अपने पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था.

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