'बढ़ते शहरीकरण से पानी की गंभीर होती समस्या'

  • 22 मार्च 2012
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Image caption भारत में 30 से 40 प्रतिशत लोगों को पीने के लिए दूषित या खारा पानी मिलता है.

भारत में पानी के लिए संघर्ष करने वाले संगठनों का कहना है कि बढ़ते हुए शहरीकरण और उद्योग क्षेत्र के विस्तार से पानी की गंभीर समस्या हो रही है.

दुनिया भर में गुरुवार को विश्व पानी दिवस मनाया जा रहा है और इस मौके पर भारत की राजधानी दिल्ली में पानी के कुप्रबंधन और बड़े बाँधों के खिलाफ आंदोलन कर रहे संगठन विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.

नेशनल अलाइंस फॉर पीपुल्स मूवमेंट की ओर से 'जन संसद' के नाम से पिछले दिनों से पानी की समस्याओं, उसके कुप्रबंधन और बड़े बाँधों के खिलाफ कार्यक्रम जारी है.

नेशनल अलाइंस फॉर पीपुल्स मूवमेंट के पदाधिकारी मधुरेश कुमार ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा कि भारत में आने वाले दिनों में पानी की बड़ी समस्या होने वाली है.

'पीने के लिए पानी नहीं'

उन्होंने कहा, “आज की तारीख में शहरों में 20 से 25 फीसदी लोग, जो गरीबी रेखा से नीच हैं, उनको पीने का पानी नहीं मिल रहा है. देश भर में 30 से 40 प्रतिशत लोगों को दूषित या खारा पानी मिल रहा है.”

उनके मुताबिक भारत ने हाल ही में जल नीति का एक मसौदा तैयार किया है, जिसमें स्पष्ट तौर पर पानी के निजीकरण की सिफारिश की गई है.

मधुरेश कुमार का कहना है कि रेलवे स्टेशन के प्लेट फार्म पर पानी की टोटियां नहीं हैं लेकिन बड़ी-बड़ी कंपनियों की बोतलों में पानी खूब मिलता है.

दिल्ली में पानी की समस्याओँ, उसके कुप्रबंधन और बड़े बाँधों के खिलाफ चल रहे कार्यक्रम ‘जन संसद’ में 20 राज्यों से 150 के करीब संगठन भाग ले रहे हैं.

उनके मुताबिक कोक और पेप्सी के खिलाफ पलाचिमाड़ा, मेंहनीगढ़, बनारस, केरल और राजस्थान सहित बहुत जगहों पर आलंदोलन चल रहे हैं क्योंकि उन कंपनियों ने गलत तरीके से पानी का इस्तेमाल किया है.

भारत में बड़े बाँधों के खिलाफ भी आंदोलन चल रहा है और बाँधों के खिलाफ काम कर रहे संगठनों का कहना है कि बाँध बना कर नदियों को मारने का कार्यक्रम चल रहा है.

गंगा नदी पर बनने वाले बाँधों और नदी को दूषित करने के खिलाफ आईआईटी के पूर्व प्रोफेसर रहे जीडी अग्रवाल दिल्ली में उपवास पर बैठे हैं.

जंतर मंतर पर हो रहे विरोध प्रदर्शन में पलाचिमाड़ा कोक विरोध संगठन, नदी घाटी मोर्चा, मत्तु जन संगठन, किसान संघर्ष समिति, नरबदा बचाव आंदोलन और अन्य संगठन शामिल हैं.

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