ओडिशा: नक्सलियों की खींचतान में रुकी वार्ता

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Image caption झिना हिकाका लक्ष्मीपुर की जनजातीय सीट से विधायक हैं

ओडिशा में दो इतालवी नागरिकों के अपहरण के मामले ने शनिवार को एक दूसरा रुख़ अख़्तियार कर लिया है. नक्सलियों और सरकार के बीच वार्ता कर रहे दोनों वार्ताकारों बीडी शर्मा और दंडपाणि मोहांती ने वार्ता स्थगित करने की घोषणा की है.

कोरापुट में एक विधायक झिना हकाका का माओवादियों की ओर से किया गया अपहरण इसकी वजह बनी है.

इसके बाद ओडिशा में माओवादियों के बीच आपसी खींचतान की ख़बरें सतह पर आ गई हैं और वार्ताकारों ने भी साफ़ कर दिया है कि जब तक माओवादी आपस में तालमेल नहीं कर लेते तब तक वे वार्ता नहीं करेंगे.

वैसे सरकार की ओर से मुख्यमंत्री ने सुबह कहा था कि इतालवी नागरिकों की रिहाई के लिए वार्ता जारी रहेगी.

ओडिशा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के संगठन सचिव सव्यसाची पांडा ने एक टेप जारी करके विधायक के अपहरण की निंदा की है.

मतभेद

एक हफ़्ते पहले इटली के निवासी बोसस्को पाओलो और क्लौडियो कोलेनजिलो को कंधमाल और गंजाम जिले की सीमा से अगवा किया गया था और इनकी रिहाई के लिए नक्सलियों ने सरकार के सामने शर्ते रखी थीं.

इन शर्तों पर बातचीत के लिए सरकार राज़ी हो गई थी और इसके बाद नक्सलियों ने संघर्ष विराम की घोषणा की थी.

बीडी शर्मा और दंडपाणि मोहांती सरकार और नक्सलियों के बीच वार्ताकार की भूमिका निभा रहे थे.

इस बीच शुक्रवार को देर रात नक्सलियों ने कोरापुट में एक विधायक का अपहरण कर लिया.

ओ़डिशा में नक्सलियों का कहना है कि ये विधायक का अपहरण श्रीकाकुलम-कोरापुट डिविज़न के नक्सलियों ने किया है, जो सव्यसाची पांडा गुट के फ़ैसलों और कार्रवाइयों से सहमत नहीं है.

भुबनेश्वर से एक स्थानीय पत्रकार ने बीबीसी को बताया कि सव्यसाची पांडा ने एक टेप जारी करके कहा है कि विधायकों का अपहरण करना ग़लत है और उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए.

उनका कहना है कि सव्यसाची पांडा ने एक हफ़्ते पहले कुछ पत्रकारों को दिए साक्षात्कार में भी कहा था कि नक्सलियों का एक गुट जिस तरह से लोगों की हत्या कर रहा है और लोगों को परेशान कर रहा है उससे नक्सलियों की छवि ख़राब हो रही है.

एक पुलिस कर्मी की हत्या के बाद आए पांडा के इस बयान से ये ज़ाहिर हो गया था कि नक्सलियों के बीच खींचतान चल रही है लेकिन एक गुट के संघर्ष विराम करने और दूसरे गुट की ओर से विधायक का अपहरण कर लेने से ये खींचतान सतह पर आ गई है.

वार्ता स्थगित

इस खींचतान का सीधा असर इतालवी नागरिकों की रिहाई के लिए चल रही बातचीत पर पड़ा है.

वार्ताकार दंडपाणि मोहांती ने पत्रकारों को बताया कि अपहरण के बाद बातचीत के लिए दोनों पक्षों की तरफ से संघर्ष विराम पर सहमति जताई गई थी लेकिन विधायक के अपहरण किए जाने से साफ है कि नक्सली संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रहे है.

उन्होंने कहा कि जब तक नक्सली अगवा किए गए लोगों को छोड़ नहीं देते तब तक के लिए वार्ता स्थगित की जा रही है.

उन्होंने एक बयान जारी करके 20 मार्च को एक सब इंस्पेक्टर को मारे जाने की घटना पर भी आपत्ति जताई है.

उन्होंने नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा है, "हम महसूस करते हैं कि शांतिपूर्व वार्ता का मज़ाक उड़ाया गया है. इसलिए हम वार्ता स्थगित कर रहे हैं. हम माओवादियों से अपील करते हैं कि मानवीय रास्ता अपनाएँ और अगुवा किए गए लोगों को रिहा किया जाए."

विधायक का अपहरण

विधायक झिना हिकाका के अपहरण के बाद शनिवार को ओडिशा विधानसभा में जमकर हंगामा हुआ और कार्रवाई नहीं चल सकी.

मुख्यमंत्री नवीन पटनायाक ने इसके बाद पत्रकारों से बातचीत में कि उन्होंने फोन पर केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम से बात की है जबकि राज्य की मुख्य सचिव ने केंद्रीय गृहसचिव को हालात से अवगत करवाया है.

उन्होंने इतालवी नागरिकों की रिहाई के लिए नक्सलियों से वार्ता जारी रखने की बात भी कही थी.

पुलिस ने कहा है कि अपहरण उस समय हुआ जब विधायक अपने घर लौट रहे थे. छत्तीस वर्षीय झिना हिकाका लक्ष्मीपुर की जनजातीय सीट से सत्तारूढ़ दल बीजू जनता दल के विधायक हैं.

कोरापुट सदर थाने के एक पुलिस अधिकारी जीबी अतरजो ने बीबीसी को बताया है कि ये घटना कोरापुट के तोयापुट इलाके की है. ड्राइवर और पीए को छोड़ दिया

पुलिस अधिकारी के अनुसार विधायक झिना हिकाका रात को दो बजे कोरापुट से लक्ष्मीपुर लौट रहे थे.

अधिकारी ने बताया कि तोयापुट के पास उनकी गाड़ी को संदिग्ध हथियारबंद माओवादियों ने रोका और सबको गाड़ी से उतारकर जंगल की ओर ले गए. थोड़ी देर बाद ड्राइवर और पीए छोड़ दिया गया.

ऐसी भी ख़बरें हैं कि अपहरणकर्ताओं ने विधायक के वाहन पर पोस्टर लगाए हैं.

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