समाचार पत्रों में छाया रहा घूस का मामला

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Image caption विभिन्न समाचार पत्रों ने मामले पर सवाल उठाए हैं

सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह को घूस की पेशकश के आरोप का मुद्दा मंगलवार को समाचार पत्रों में छाया रहा. नजर डालते हैं कुछ अखबारों के संपादकीय पर.

'द हिंदू'--शीर्षक 'जवाबों से सवाल ज्यादा'

हालांकि सीबीआई जांच का आदेश दिया गया है, यह विवाद कई सवाल खड़े करता है--दोनों सेना से और जनरल सिंह से. उदारहण के तौर पर, अगर यह सच है कि सेनाध्यक्ष ने घूस की पेशकश के बारे में रक्षामंत्री ऐके एंटोनी को बताया था तो फिर इसमें उसी समय जांच का आदेश क्यों नहीं दिया गया? क्या यह करने के लिए समाचार पत्र के खुलासे या संसद में खलबली का इंतजार था?

अमर उजाला-शीर्षक 'सेना को मजाक न बनाएं'

आखिर कैसे किसी की इतनी हिम्मत हो सकती है कि वह सीधे सेना प्रमुख को ही घूस देने की पेशकश कर दे? फिर यह दुस्साहस करने वाला सेना का कोई सेवानिवृत अधिकारी ही क्यों न हो...लेकिन जनरल सिंह को यह तो बताना चाहिए कि वे कौन लोग हैं, जो उन्हें प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे, आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि वह इतने दिनों तक चुप रहे?

दैनिक भास्कर--शीर्षक 'भ्रष्टाचार का दुस्साहस'

जनरल सिंह ने जो खुल्लासा किया है, उसमें सिर्फ यही नई बात सामने आती है कि भ्रष्टाचार का यह जाल किस ऊंचाई और स्तर तक फैलता जा रहा है. अब यह सरकार को साफ करना है कि उसके पास इस गंभीर समस्या से निपटने की क्या रणनीति है? सेना की साख ऐसा सवाल है, जिस पर देश समझौता नहीं कर सकता.

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया -- शीर्षक 'सेनाध्यक्ष को रिश्वत'

राष्ट्रमंडल खेल, आदर्श, टूजी और कोयला घोटाले के बाद, सेनाध्यक्ष वीके सिंह का आरोप कि उन्हें एक लॉबिस्ट ने 14 करोड़ रुपए घूस की पेशकश की थी, भ्रष्टाचार पर मचे कोलाहल को बढ़ाता है. ये एक गंभीर आरोप है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता बल्कि इसकी जांच होनी जरूरी है. रक्षामंत्री एके एंटनी ने सीबीआई की जांच का आदेश देकर सही काम किया है.

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