पटना में सीपीआई का सम्मेलन, विकल्प की तलाश

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Image caption सीपीआई अपनी खोई हुई सियासी ज़मीन को लेकर चिंतित है.

भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी यानि सीपीआई का राष्ट्रीय महाधिवेशन ( 21 वीं कांग्रेस) मंगलवार से पटना में शुरू हो रहा है.

बिहार में 25 वर्षों के बाद तीसरी बार पार्टी की ये कांग्रेस आयोजित हो रही है. इसमें देश के विभिन्न हिस्सों से आये हुए लगभग एक हज़ार निर्वाचित पार्टी प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं.

सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान ने पत्रकारों को बताया कि मंगलवार को पटना में रैली निकाली जाएगी और उसी दिन गाँधी मैदान में सार्वजानिक सभा होगी.

बुधवार को उदघाटन सत्र होगा, जिसे पार्टी महासचिव एबी बर्धन संबोधित करेंगे.

इसी उदघाटन सत्र में भाग लेने के लिए सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात समेत देश के सभी प्रमुख वाम दलों के महासचिवों को आमंत्रित किया गया है.

विकल्प की तलाश

ज़ाहिर है कि ये सभी वामपंथी पार्टियाँ इसी बहाने एक मंच पर आकर ग़ैर भाजपाई और ग़ैर कांग्रेसी तीसरे राजनीतिक विकल्प के रूप वाम दलों की एकजुटता पर विचार करेंगी.

अतुल कुमार अनजान ने कहा भी है, ''एनडीए की ढलती हुई और यूपीए की फिसलती हुई सत्ता के बीच से तीसरे रास्ते की तलाश इस पार्टी कांग्रेस की चर्चा में मुख्य विचारणीय विषय होगी.''

वैसे, ग़ौर करने लायक बात ये है कि बिहार में ना सिर्फ सीपीआई, बल्कि सीपीएम ने भी अपना पुराना जनाधार खोया है. सिर्फ सीपीआई-एमएल का जन समर्थन कुछ हद तक बचा हुआ है.

लेकिन चुनावी लिहाज से इस राज्य में सभी वामपंथी दलों की स्थिति नगण्य-सी हो चुकी है. ख़ासकर सीपीआई यहाँ अपनी खोई हुई सियासी ज़मीन को लेकर ज़्यादा चिंतित है.

संभवतः इसी चिंता के तहत सीपीआई बिहार में ढाई दशक बाद पार्टी कांग्रेस के आयोजन से अपने खोये हुए जनाधार की वापसी जैसी सम्भावना तलाश रही है.

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