आत्मदाह करने वाले तिब्बती की दिल्ली में मौत

  • 28 मार्च 2012
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Image caption इस तिब्बती युवक ने सोमवार को विरोध के दौरान खुद को आग लगा ली थी

तिब्बत के उस युवक की दिल्ली में मौत हो गई है जिसने सोमवार को विरोध के दौरान खुद को आग लगा ली थी. इस युवक ने चीन के राष्ट्रपति हू जिंताओ की भारत यात्रा से पहले आत्मदाह करने की कोशिश की थी. ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीन समेत चार देशों के नेता भारत आए हुए हैं.

हू जिंताओ की यात्रा के विरोध में दिल्ली में बुधवार को तिब्बतियों ने दिल्ली में प्रदर्शन करने की कोशिश की. हालांकि ज्यादातर तिब्बती इलाके सील कर दिए गए हैं जिस कारण लोग अपने इलाके से बाहर नहीं निकल पाए.

जू जिंताओ के दौरे को देखते हुए दिल्ली में जगह-जगह पुलिस तैनात है. मजनू का टीला इलाके में बड़ी संख्या में शरणार्थी रहते हैं. लोगों ने बताया कि उनका इलाका सील कर दिया गया है और माहौल तनावपूर्ण है.

एक स्थानीय तिब्बती ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "हमें प्रदर्शन करने की अनुमित नहीं दी गई. सब जगह पुलिस ही पुलिस है. हमारी योजना थी कि संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर जाकर प्रदर्शन किया जाए लेकिन ये योजना सफल नहीं हो पाई क्योंकि हमारा इलाका सील है. हम चीन की नीति से खुश नहीं है. हमारी माँग है कि तिब्बत में हमारे मानवाधिकारों का सम्मान हो, धार्मिक स्वतंत्रता हो."

पिछले कुछ महीनों में 25 से ज्यादा तिब्बती चीन की नीतियों के खिलाफ आत्मदाह कर चुके हैं. युवकों के आत्मदाह करने पर तिब्बती समुदाय के लोगों का कहना है कि अपना हक माँगने का ये उनका तरीका है.

मजनू का टीला में ही एक तिब्बती नागरिक कहते हैं, "70 और 80 के दशक में पैदा हुए तिब्बती युवकों को अपना हक और मानवाधिकार चाहिए. वे अपने गुरु को अपने साथ देखना चाहते हैं. इसी वजह से वे आत्मदाह कर रहे हैं. इन सबकी प्रतिक्रिया एक ही है."

तिब्बतियों के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा तिब्बत में चीनी शासन के ख़िलाफ़ बौद्ध भिक्षुओं के बढ़ते आत्मदाह के मामलों पर चिंता जता चुके हैं.

पिछले साल नवंबर में बीबीसी से हु बातचीत में दलाई लामा ने कहा था कि वे ऐसे क़दमों को बढ़ावा नहीं देते. उनका कहना था कि इसके लिए हिम्मत तो चाहिए पर साथ ही उन्होंने सवाल भी उठाया था कि ऐसे क़दम कितने कारगर हैं.

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