सेनाध्यक्ष के खिलाफ मानहानि का मुकदमा

Image caption तेजिंदर सिंह ने अपनी याचिका में जनरल वी के सिंह के अलावा भी फौजी अफसरों पर आरोप लगाए हैं.

भारतीय सेना के सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह ने सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया है.

दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने इस मामले अगली सुनवाई 10 अप्रैल को रखी है.

अदालत में जनरल सिंह के खिलाफ मुकदमा दायर करने के बाद तेजिंदर सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ लगातार नियम विरुद्ध तरीके से गलत बयानी की जा रही है इसलिए वो अदालत की शरण में आए हैं.

आरोप

मुकदमा दायर करने के बाद तेजिंदर सिंह के वकील ने कहा "पाँच मार्च को सेना ने तेजिंदर सिंह के खिलाफ एक वक्तव्य जारी किया था जो कि ना केवल गलत था बल्कि नियम विरुद्ध भी था."

इसके अलावा तेजिंदर सिंह के वकील अनिल अग्रवाल ने सिंह के ऊपर बार-बार अपने बयान बदलने का आरोप भी लगाया है. वकील ने यह भी कहा "पहले वीके सिंह ने कहा था कि तेजिंदर सिंह ने 50 करोड़ रुपयों की रिश्वत की पेशकश की है फिर उन्होंने यह रकम घटाकर 14 करोड़ रुपए कर दी. इसमें अगर कोई सच्चाई होती तो रकम एक सी रहती यह रकम बार-बार क्यों बदल रही है."

तेजिंदर सिंह ने अपनी याचिका में जनरल वीके सिंह, उप सेनाध्यक्ष एसके सिंह, लेफ्टिनेंट जनरल बीएस ठाकुर, मेजर जनरल एसएल नरसिम्हन और लेफ्टिनेंट कर्नल हितेन साहनी पर आरोप लगाए हैं.

विवाद

मंगलावर को जनरल वीके सिंह द्वारा एक अखबार को दिए इंटरव्यू पर मचे हंगामे के बाद रक्षामंत्री एके एंटनी ने लोकसभा में कहा था कि जनरल वीके सिंह ने उन्हें बताया था कि तेजिंदर सिंह ने उन्हें 14 करोड़ रुपयों की रिश्वत देने की पेशकश की थी.

एंटनी ने यह भी दावा किया था कि वीके सिंह उन्हें इस बात की लिखित शिकायत देने से इनकार कर दिया था.

उधर कुछ मीडिया में नाम आने के बाद सेवानिवृत्त लेफ़्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह ने इससे किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है.

सेवानिवृत्त लेफ़्टिनेंट जनरल तेजिंदर सिंह ने बीबीसी से बात करते हुए कहा था, "सेनाध्यक्ष से आखिरी बार मेरी मुलाकात करीब डेढ़ साल पहले सितंबर 2010 में हुई थी. उसके बाद तो मैं उनसे मिला ही नहीं. उनसे जब मिला था तो सामान्य बातचीत हुई थी. मैं उनके पास किसी निजी काम से गया था. मैं किसी कंपनी का प्रतिनिधित्व नहीं करता था, ना करता हूं. ऐसी कोई बात नहीं हुई, ना मेरे पास ऐसी कोई बात करने का अधिकार था."

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