प्रधानमंत्री को लिखा पत्र लीक करना राजद्रोह है: सेनाध्यक्ष

  • 29 मार्च 2012
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सेना अध्यक्ष वीके सिंह ने कहा है कि सेना से जुड़े प्रधानमंत्री मनमोहन को लिखे पत्र के लीक होने से उनका कोई लेना देना नहीं है. उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा है कि इस तरह पत्र लीक करने को राजद्रोह समझा जाना चाहिए और लीक करने वाले को सजा दी जानी चाहिए.

सरकार और सेना अध्यक्ष जनरल वीके सिंह के बीच का विवाद लगातार गहराता जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने खबर छापी है कि जनरल वीके सिंह ने सीबीआई को एक पत्र बढ़ाया है और सिफारिश की है कि वर्तमान में कार्यरत एक लेफ़्टिनेंट जनरल के खिलाफ जाँच की जाए.

ये पत्र कथित तौर पर तृणमूल कांग्रेस के सांसद अंबिका बनर्जी ने मई 2011 में लिखा था जिसमें कहा गया था कि लेफ़्निेंट जनरल दलबीर सिंह सुहाग के खिलाफ जांच की जाए.

अगले सेना अध्यक्ष बनने के क्रम में लेफ़्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह के बाद लेफ़्ट जनरल दलबीर सिंह सुहाग का ही नाम है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक तृणमूल सांसद ने आरोप लगाया था कि स्पेशल फ्रंटियर फोर्स में सामान की खरीद में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है. इस समय लेफ़्टिनेंट जनरल दलबीर सिंह स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के इंस्पेक्टर जनरल थे.

स्पेशल फ्रंटियर फोर्स खुफिया एजेंसी रॉ की प्रशासनिक ईकाई के तहत आता है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सांसद ने अपने पत्र में पूर्व सेनाध्यक्ष समेत कई सैन्य अधिकारियों का नाम लिया है और आरोप लगाया है कि रक्षा सौदों में इन्होंने कथित तौर पर करोड़ों की कमाई की है.

घूस का आरोप

इससे पहले बुधवार को रक्षा मंत्री एके एंटनी ने राज्यसभा में स्वीकार किया था कि सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखी थी. उन्होंने चिट्ठी की ब्यौरा देने से मना कर दिया था.

भारतीय मीडिया में छपी ख़बरों के अनुसार सेनाध्यक्ष ने प्रधानमंत्री को लिखी कथित चिट्ठी में भारतीय सेना के पास हथियारों और बारूद की कमी की जिक्र किया था.

सेनाध्यक्ष एक इंटरव्यू में ये आरोप भी लगा चुके हैं कि उन्हें एक लॉबिस्ट ने 14 करोड़ रुपए की घूस देने की पेशकश की थी और उन्होंने ये बात रक्षा मंत्री को बताई थी. इस मुद्दे को लेकर लगातार हंगामा होता रहा है.

इससे पहले जनरल वीके सिंह अपनी जन्म तिथि को लेकर भी काफ़ी विवादों में रहे थे.

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