बर्मा चुनाव में सू ची को लेकर उत्साह

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Image caption चुनाव प्रक्रिया से शिकायत होने के बावजूद सूची चुनावों का बहिष्कार नहीं करेगीं

बहुत लंबे समय तक कठोर सैनिक शासन में रहने वाले बर्मा में एक अप्रैल को होने जा रहे 45 सीटों के उप-चुनाव को लेकर दुनिया में कौतूहल, उत्साह और आशंका तीनों हैं.

प्रजातंत्र की ओर नन्हे कदम बढ़ाते बर्मा की तरफ दुनिया इसलिए देख रही है क्योंकि इन चुनाव में सालों तक जेल में बंद रही लोकतंत्रवादी नेता आंग सान सू ची खोमू संसदीय क्षेत्र से मैदान में हैं.

उनकी पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है. हालाँकि परिणाम कितना भी उनके दल के पक्ष में जाएं सेना समर्थित सत्ताधारी पार्टी के बहुमत को कोई ख़तरा नहीं है.

विवादों के साये

साल 1990 में सू ची की पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला था लेकिन उनकी पार्टी को कभी सत्ता में आने नहीं दिया गया.

सू ची ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि लोगों को धमकाया जा रहा है और उनकी पार्टी की प्रचार सामग्री को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है.

सू ची ने प्रजातंत्र के लिए लड़ते हुए करीब 22 साल नज़रबंदी या कारावास में बिताए हैं.

बर्मा की सरकार ने दुनिया भर से इन चुनाव को देखने के लिए पर्यवेक्षकों को आने की अनुमति दी है बावजूद इसके यह साफ़ नहीं है कि इन पर्यवेक्षकों को कितनी आज़ादी होगी.

नोबल शांति पुरस्कार विजेता सू ची ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें यह चुनाव पूरी तरह से स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं लगते.

उत्साह

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Image caption साल 1990 में सूची की पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला था लेकिन उनके पार्टी को कभी सत्ता में आने नहीं दिया गया.

रंगून में दिन भर काम कर अपने गावों घरों की तरफ लौट रहे रहे कामकाजी लोगों से बात करें तो सभी इन चुनाव को लेकर उत्साहित हैं खास तौर पर आंग सान सू ची को लेकर.

रंगून की सर्क्युलर ट्रेन में अपनी खाली टोकरी के साथ बैठे अपने बचे माल को संभालाते लोगों से आप चुनाव की, उनके अरमानों और अनुमानों की बात करें तो वो झिझकते नहीं हैं.

एक बड़ी खाली सी ट्रे लेकर अपने स्टेशन के आने का इंतजार कर रही एक महिला कहती है वो आंग सान सू ची को ही अपना वोट डालेगी. यह महिला मानती है कि सू ची लोगों की कद्र करती हैं और उनके साथ खड़ी रहती हैं.

वह कहती हैं कि साल भर पहले चुनकर आई जनतांत्रिक सरकार के आने के बाद उनके जीवन में कोई परिवर्तन नहीं आया. इस महिला को यह भरोसा है कि अगर सू ची सत्ता में आईं तो सब ठीक हो जाएगा. इस महिला का कहना है कि उसके बड़े बुजुर्गों का भी यही मानना है.

अनिश्चय

उसके बगल ही में बैठे एक दूसरे बुजुर्ग व्यक्ति भी उस महिला का समर्थन करते हैं और कहते हैं कि 100 में से 80 लोग सू ची का समर्थन करते हैं. इन सज्जन की प्राथमिकता है शांति अमन. हालांकि उन्होंने अभी यह तय नहीं किया है कि वो वोट डालेंगे या नहीं.

इन दोनों से थोड़ी दूर बैठी अपने नन्हे बच्चे को दूध पिलाती एक महिला कहती है कि उसे अधिकारियों ने बताया नहीं है कि उसके इलाके से कौन खड़ा है. इस महिला के अनुसार अव्वल तो वो वोट डालेगी नहीं लेकिन अगर डाला तो जहाँ अधिकारी कहेंगे वहीं डाल देगी.

इन लोगों से बातचीत से बर्मा के उपचुनावों का पूरा नजारा सामने आ जाता है . लोगों में चुनाव को लेकर उत्साह है और वो चुनाव में सू ची और उनकी पार्टी को लेकर उत्साहित भी हैं लेकिन ऐसे लोगों भी हैं जो वही करेंगे जो उन्हें सालों से सत्ता पर काबिज़ सेना समर्थक अधिकारी कहेंगे.

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