बंधक संकट: माओवादियों की चेतावनी

  • 2 अप्रैल 2012
बोसुस्को पाउलो
Image caption माओवादी एक इतालवी नागरिक को पहले ही छोड़ चुके हैं लेकिन दूसरा अभी भी उनके कब्जे में है

इतालवी नागरिक बोसुस्को पाउलो को रिहा करने की दो मध्यस्थों की अपील माओवादियों ने खारिज कर दी है. पाउलो 14 मार्च से माओवादियों के कब्जे में हैं.

सीपीआई (माओवादी) ओडिशा स्टेट ऑर्गेनाइजिंग कमेटी के सचिव सब्यसाची पांडा ने मीडिया को एक ऑडियो संदेश भेजा है.

इसमें कहा है कि उन्हें दो वार्ताकारों का लिखा पत्र मिला है जिसमें उन्होंने बोसुस्को पाउलो को इस आधार पर छोड़ने की अपील की है कि राज्य सरकार ने कुछ माओवादियों और उनसे सहानुभूति रखने वालों को छोड़ने की माओवादियों की प्रमुख मांग को पूरा करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है.

'कौन सी मांग मानीं'

पांडा ने कहा कि इस पत्र में स्पष्ट नहीं किया गया है कि सरकार ने माओवादियों की कौन सी मांगें मंजूर की हैं और किन मांगों को नहीं माना है.

उनका कहना है कि सरकार को बताना चाहिए कि वो कितने लोगों को रिहा करने पर राजी है, वे लोग कौन हैं और कितनी जल्दी उन्हें छोड़ा जाएगा.

माओवादी नेता ने सात लोगों का नाम लिया है जिनकी रिहाई इतालवी नागरिक को छोड़ने का मार्ग प्रशस्त कर सकती है.

इनमें चासी मुलिया आदिवासी संघ के सलाहकार गंगानाथ पात्रा, आरती मांझी और कमलकांत सेठी शामिल हैं.

सरकार की उम्मीदों पर पानी फेरा

पांडा का कहना है कि इनकी रिहाई पर सहमति पर दोनों वार्ताकार दस्तखत कर देते हैं और राज्य सरकार इसे मंजूर कर लेती है तो वो इतालवी नागरिक को छोड़ देंगे.

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Image caption सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता का कहना है कि सरकार माओवादियों के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है

पांडा ने धमकी दी है कि सरकार ने अगर बातचीत में हिचकिचाहट नहीं छोड़ी और जासूसी तथा माओवादियों के बारें में दुष्प्रचार बंद नहीं किया तो उन्हें अंतिम फैसला करने पर मजबूर होना पड़ेगा.

वार्ताकारों की अपील ठुकराकर माओवादी नेता ने इतालवी नागरिक की जल्द रिहाई पर सरकार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

इसबीच, अगवा किए गए सत्ताधारी पार्टी के विधायक झिना हिकाका की रिहाई के लिए सरकार से बातचीत का न्योता मिलने के तीन दिन बाद आदिवासियों और किसानों के एक संगठन चासी मुलिया आदिवासी संघ ने बातचीत के लिए कुछ शर्तें रखी हैं.

हिकाका की रिहाई के लिए शर्तें बताते हुए चासी मुलिया आदिवासी संघ के अध्यक्ष नचिका लिंगा लिंगा ने एक बयान में कहा कि उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले सरकार को वापस लेने होंगे, संघ के सभी सदस्यों को जेल से छोड़ना होगा और माओवादियों के खिलाफ अभियान रोकना होगा.

'गुमराह कर रही है सरकार'

इस बीच सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता अभय ने बीबीसी को भेजे गए एक वक्तव्य में कहा है की ओडिशा और केंद्र की सरकारें सरकारी समाचार माध्यमों और कुछ दैनिक समाचार-पत्रों के जरिए दुष्प्रचार कर रही हैं कि माओवादी पार्टी के अंदर अराजकता और अनुशासनहीनता समस्या पैदा हो गई है.

हैदराबाद से बीबीसी संवाददाता उमर फारूक के मुताबिक इस पत्र मे उन्होंने कहा कि पोलित ब्यूरो और केंद्रीय समिति के सदस्य एम कोटेश्वर राव उर्फ़ किशनजी सहित कुछ बड़े नेताओं के मारे जाने से पार्टी को धक्का लगा है और इसी का फायदा उठाकर केंद्र और राज्य सरकारें पार्टी के खिलाफ मानसिक हमला करने के लिए इस तरह का प्रचार कर रही हैं ताकि लोगों को गुमराह किया जा सके.

अभय ने कहा की इटली के पर्यटकों और बीजू जनता दल के विधायक झिना हिकाका का अपहरण अलग-अलग समितियों ने अलग-अलग कारणों से किया है और इन घटनाओं का आपस में कोई संबंध नहीं है.

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