चुनावी मैदान में नहीं उतरेंगे अखिलेश

अखिलेश यादव इमेज कॉपीरइट reuters
Image caption अखिलेश की लोकसभा सीट अब खाली हो जाएगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जनता के बीच जाकर सीधे विधान सभा चुनाव लड़ने के बजाय विधान परिषद का सदस्य बनने का फ़ैसला किया है.

अखिलेश अभी कन्नौज से लोकसभा सदस्य हैं. संविधान के मुताबिक़ उन्हें मुख्यमंत्री बने रहने के लिए छह महीने के अंदर विधान मंडल का सदस्य होना अनिवार्य है.

समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद चुनाव के लिए जिन सात उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं, उनमें अखिलेश यादव का नाम सबसे ऊपर है.

पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी विधान परिषद की सदस्य बनी थीं. वैसे ही जैसे प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह लोकसभा के बजाय राज्यसभा के सदस्य हैं.

समाजवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री अखिलेश के अलावा राजस्व मंत्री अम्बिका चौधरी को भी विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया है.

चौधरी विधान सभा का चुनाव हार गए थे, लेकिन उनके लंबे संसदीय अनुभव को देखते हुए उन्हें मंत्री बनाया गया.

समाजवादी पार्टी के अन्य उम्मीदवारों में पार्टी प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी, विजय यादव, डाक्टर मधु गुप्ता, उम्र खान और नरेश उत्तम हैं.

जोखिम

विधान परिषद के इस द्विवार्षिक चुनाव में विधान सभा के सदस्य मतदाता हैं और हर पार्टी को उसकी सदस्य संख्या के अनुपात में विधान परिषद सदस्य मिल जाते हैं. इसलिए इसमें कोई जोखिम नही है.

ऐसा लगता है कि अखिलेश यादव फिलहाल विधान सभा चुनाव लड़कर कोई जोखिम नही लेना चाहते, हालाँकि उनके पिता मुलायम सिंह यादव सीधे विधान सभा का चुनाव लड़ते रहे हैं.

उनके गृह क्षेत्र जसवंत नगर से चाचा शिवपाल यादव विधायक हैं और विधान सभा चुनाव के लिए उन्हें कोई दूसरी सीट खाली करानी पड़ेगी.

अब देखना यह होगा कि अखिलेश यादव के लोकसभा क्षेत्र कन्नौज से समाजवादी पार्टी किसे चुनाव लड़ाएगी?

अखिलेश यादव की पत्नी डिम्पल यादव का नाम भी चर्चा में है.

संबंधित समाचार