सेनाध्यक्ष को 'विवादित खबर' का अंदाजा था?

  • 6 अप्रैल 2012
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Image caption जनरल वीके सिंह ने भी इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को खारिज किया है

क्या सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह को ये संदेह था कि मीडिया में 'सेना की गतिविधि' की कोई 'विवादित' खबर छप सकती है?

कम से कम अंग्रेजी पत्रिका द वीक को मार्च में दिए इंटरव्यू से ऐसा ही लगता है. इस इंटरव्यू में जनरल वीके सिंह ने इसकी आशंका जताई थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने इस इंटरव्यू के अंश जारी किए हैं.

वीके सिंह ने द वीक को जो इंटरव्यू दिया था, उसका ऑडियो भी जारी हुआ है, जिसमें जनरल वीके सिंह ने कुछ वर्दी और बिना वर्दी वाले कुछ लोगों पर सवाल भी खड़े किए हैं.

बुधवार को उस समय बखेड़ा खड़ा हो गया था, जब अंग्रेजी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस ने ये रिपोर्ट छापी कि जिस दिन सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह अपने उम्र विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे, उसी दिन (16-17 जनवरी) सेना की दो टुकड़िया सरकार को सूचना दिए बिना दिल्ली की ओर आगे बढ़ी थी.

सरकार और सेना दोनों ने इस खबर को आधारहीन बताया है और सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह ने भी इस रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है.

इंटरव्यू

लेकिन मामले में नया मोड़ उस समय आया, जब जनरल वीके सिंह का द वीक को मार्च में दिया इंटरव्यू सामने आया है.

उस इंटरव्यू में जनरल वीके सिंह ने कहा था, "अगर सेना कुछ अभ्यास करती है तो कुछ 'दुष्ट मंशा' वाले लोग कहेंगे कि वे कुछ और चाहते थे. मान लीजिए हमारा एक कॉर्प या एक डिविजन या एक ब्रिगेड अभ्यास करता है, तो कुछ लोग कहेंगे, ओह उन्होंने अभ्यास किया. वो अभ्यास नहीं था. वे कुछ और करना चाहते थे."

जनरल वीके सिंह ने आगे कहा था- अब आप इससे कहानी निकालोगे. कई लोग ऐसे हैं, जो दुष्ट मंशा के लिए आजकल कहानी बनाना चाहते हैं.

सेनाध्यक्ष ने ये भी कहा था कि आजकल बुरी खबर पत्रकारों के लिए अच्छी खबर होती है, जबकि अच्छी खबर कोई खबर नहीं होती, ये सामान्य चीज होती है.

जनरल वीके सिंह का ये भी कहना था कि अगर किसी को संदेह है, तो उन्हें उनका सामना करना चाहिए, लेकिन वे लोग ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि वे जानते हैं कि वे गलत हैं.

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