ऑपरेशन ऑक्टॉपस के खिलाफ अभियान शुरू: माओवादी

  • 7 अप्रैल 2012
माओवादियों
Image caption पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि लातेहार के ये जंगल माओवादियों के छुपने के आखिरी बचे माकूल ठिकानों में से एक है. (फाइल)

माओवादियों के बिहार-झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ कमेटी में प्रवक्ता मानस ने कहा है कि माओवादियों के खिलाफ इलाके में सुरक्षाबलों की तरफ से चलाए जा रहे ऑपरेशन ऑक्टोपस के खिलाफ माओवादियों ने ऑपरेशन ब्रेक ऑक्टोपस शुरू किया है.

बीबीसी से विशेष बातचीत में माओवादी नेता मानस ने पुलिस के उस दावे का भी खंडन किया जिसमें कहा गया था कि शुक्रवार को हुए लातेहार के मुठभेड़ में छह माओवादियों की मौत हुई थी.

उन्होंने कहा, ''लातेहार में पुलिस के हमले का हमने जवाब दिया जिसमे उनका एक जवान मारा गया. हमारे किसी साथी को एक खरोच तक नहीं आई है. पुलिस जो दावे पेश कर रही है वो सब झूठे है.''

झारखंड पुलिस के प्रवक्ता राज कुमार मलिक ने शुक्रवार को कहा था कि पुलिस को करमडीह के जंगलों में माओवादियों के बड़े नेताओं के मौजूदगी की खबर मिलने के बाद उन्होंने उस इलाके में छापा मारा, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में कई माओवादी मारे गए थे.

अभियान

गौरतलब है कि बीबीसी से बातचीत में पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि लातेहार के ये जंगल माओवादियों के छुपने के आखिरी बचे माकूल ठिकानों में से एक है.

उनके मुताबिक पुलिस की कोशिश है कि इन जंगलों से माओवादियों को खदेड़ दिया जाए ताकि उनके लिए छुपने का कोई ठिकाना नहीं बचे.

लातेहार के मुठभेड़ के बाद शुक्रवार को पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि खोज अभियानों में माओवादियों का कोई शव तो नहीं मिला लेकिन जंगल में कई जगह खून बिखरे मिले.

बीबीसी संवाददाता सलमान रावी के अनुसार ये पहली बार है जब सुरक्षा बलों के जवान नारायणपुर जिले के अबूजमाड इलाके में घुस पाए. इस इलाके को माओवादियों का स्थानीय मुख्यालय माना जाता है.

हालांकि माओवादी नेता मानस ने बीबीसी से बातचीत के दौरान सुरक्षा बलों के जवानों पर इलाके के कई गांवो को तबाह करने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि निर्दोष आम ग्रामीणों को माओवादियों के खिलाफ अभियान में गिरफ्तार किया जा रहा है.

बीते कुछ वर्षों में सेना और पुलिस के बड़े अभियानों के बाद माओवादी जमीन छोड़कर जंगलो की तरफ जाने को मजबूर हुए है और हिंसा के स्तर में गिरावट भी आई है. लेकिन सुरक्षाबलों पर छोटे-बड़े हमले अभी तक जारी है जिसमें हर साल सैकड़ों जवानों की जान चली जाती है.

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