मामूली होंगे ये क़दम

जरदारी और मनमोहन की मुलाक़ात
Image caption दोनों की मुलाकात से कुछ उम्मीदें जरूर बंध गई है.

पिछली बार बहाना था क्रिकेट, इस बार है धार्मिक यात्रा.

साल 2005 में पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ ने भारत-पाकिस्तान के बीच हुए क्रिकेट मैच को देखने के बहाने भारत के

तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी.

उसी तरह एक साल पहले यानि 2011 में भारत और पाकिस्तान के बीच मोहाली में हुए क्रिकेट विश्व कप के सेमी फाइनल मैच को देखने के बहाने

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी.

और अब राष्ट्रपति जरदारी अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर जियारत के लिए निजी यात्रा पर भारत आए हैं.

लेकिन इसी का फायदा उठाते हुए भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने निवास पर उन्हें दिन के भोजन पर आमंत्रित किया.

कहा जा सकता है कि परमाणु हथियारों से लैस इन दोनों पड़ोसी देशों के संबंध इतने संवेदनशील हैं कि ये दोनों आधिकारिक तौर पर आमने-सामने बातचीत से बचते रहते हैं.

कड़वाहट कम होगी ?

लेकिन उम्मीद है कि जरदारी की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंधों की कड़वाहट में कुछ कमी आएगी.

जरदारी के सीमा-पार व्यापार को बढ़ावा देने के वादे के बाद से कम से कम दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में बेहतरी की पूरी उम्मीद जताई जा रही है.

वाघा सीमा पर हालात बिल्कुल सामान्य है यानी कि कहा जाए कि दोनों देशों के बीच कोई व्यापारिक संबंध नहीं हैं.

टेलीफोन सिग्नल भी बाधित हैं.

दोनों देश एक दूसरे की गाड़ियों को भी नहीं आने देते जिसका मतलब है कि सीमा पर आने वाली हर गाड़ी से पहले सामान उतारा जाता है फिर उसे दूसरी गाड़ी में भरा जाता है.

हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार में थोडी़ बढ़ोत्तरी हुई है लेकिन दोनों देशों के बीच लगभग तीन हज़ार किलोमीटर की सीमा को देखते हुए 2.7 अरब डॉलर का व्यापार बहुत अफसोस की बात है.

ब्रिटेन को यहां से गए हुए पचास साल से भी ज्यादा हो गए हैं लेकिन ये दोनों देश अभी भी एक दूसरे के मुकाबले ब्रिटेन से द्विपक्षीय व्यापार ज्यादा करते हैं.

वाघा सीमा पर पाकिस्तान की ओर इशारा करते हए एक आदमी कहते हैं, ''हमदोनों के बीच इतना सब कुछ एक जैसा है. आखिर क्यों नहीं इस दिवार को गिराकर हम दोस्त बन जाते हैं.ब्रिटेन के जरिए किए गए बटवारे से पुराना हमारा इतिहास है.ये पूराने सिल्क रोड का हिस्सा है.''

अगर दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार बहाल हो जाते हैं तो भारत में अमृतसर स्थित खन्ना पेपर फैक्ट्री के मालिक सुनीत कोचर अपने सामान को सीधे पाकिस्तान भेज सकेंगें.

Image caption जरदारी के साथ उनके बेटे बिलावल भुट्टो भी हैं.

सुनीत कोचर अभी भी कुछ सामान पाकिस्तान भेजते हैं लेकिन तीस मिनट की दूरी पर बसे पाकिस्तान को वो अपना सामान फिलहाल समुद्र के जरिए दुबई के रास्ते भेजते हैं जिसमें हफ्तों का समय लगता है.

सुनीत कोचर कहते हैं,''ये बहुत ही पागलपन वाली स्थिती है. इसके कारण पाकिस्तानियों को 14 गुना दाम पर वही चिज खरीदनी पड़ती है.''

लेकिन अब दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में बेहतरी की उम्मीद इसलिए बढ़ गई है क्योंकि जरदारी की कोशिश है कि व्यापारिक रिश्ते को दूसरे मुद्दों से अलग किया जाए.

मतभेद

इसके अलावा पाकिस्तान के भारत को सबसे ज्यादा तरजीह वाले राष्ट्र का दर्जा देने के फैसले से भी व्यापारिक रिश्ते की बेहतरी की उम्मीद बढ़ गई है.

लेकिन अगर व्यापारिक संबंध बेहतर हो भी जाते हैं तो भी दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर बहुत गहरे मतभेद हैं.

मिसाल के तौर पर भारत के लिए 2008 में हुए मुंबई हमले की यादें अभी भी ताजा हैं.उस हमले में 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे.

भारत और अमरीका का आरोप है कि मुंबई हमलों की साजिश हाफिज सईद ने रची थी जो पाकिस्तान मे खुले आम रहते हैं.

इसी सप्ताह अमरीका ने हाफिज सईद पर दस लाख डॉलर की ईनामी रकम की घोषणा की है.

उसी तरह पाकिस्तान को अफ़गानिस्तान में भारत की दख्लअंदाजी पसंद नहीं.

जरदारी की भारत यात्रा और दोनों देशों के बीच रिश्तों में बेहतरी की उम्मीद पर भारत के जाने माने पत्रकार एमजे अकबर का मानना है कि ये बहुत ही मामूली कदम हैं.

अकबर के मुताबिक पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की मुलाकात के समय इससे कई गुना ज्यादा उम्मीदें बंध गईं थीं लेकिन आखिरकार उस मुलाकात का कोई नतीजा नहीं निकला.

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