ओडिशा: माओवादियों ने रुख कड़ा किया

  • 9 अप्रैल 2012

ओडिशा में माओवादियों के कब्ज़े में फंसे दोनों बंधकों की शीघ्र रिहाई की उम्मीदों को करारा झटका लगा है.

एक तरफ जहाँ इतालवी पर्यटक बोसुस्को पाओलो को बंधक बनाने वाले माओवादी गुट ने सरकार की एक दिन पहले की घोषणा के बारे में स्पष्टीकरण माँगा है, वहीं दूसरी तरफ बीजू जनता दल विधायक झीना हिकाका अपहरण करने वाले एक दूसरे गुट ने विधायक की रिहाई के लिए शर्त लगाई है.

सीपीआई माओवादी आंध्र ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमिटी के प्रवक्ता जगबंधु ने रविवार को मीडिया बयान जारी किया है.

जगबंधु ने कहा है कि जिनकी रिहाई की उन्होंने मांग की थी मंगलवार को उन सभी 30 कैदियों को कोरापुट जिले के बालीपेटा गाँव पहुँचाया जाए, तो झीना हिकाका को उनके परिवार के हाथों सौंप दिया जाएगा.

उन्होंने कहा कि कैदियों और झीना हिकाका के परिवार के सदस्यों के अलावा इस टोली में केवल दोनों मध्यस्थ डॉ. बीडी शर्मा और दंडपानी मोहन्ती तथा कोरापुट के वकील निहार पटनायक हों.

उन्होंने चेतावनी दी है कि दल में कोई पुलिसवाला या ख़ुफ़िया कर्मचारी न हो.

टेप में सरकार पर चालबाजी का आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया गया है कि बंधक विधायक को तभी छोड़ा जाएगा जब सरकार उनकी मांगें पूरी करेगी और वह भी मंगलवार तक.

माओवादियों ने जिन 30 लोगों की रिहाई के बदले हिकाका को मुक्त करने की पेशकश की है, उनमें ऐसे 23 लोग हैं जिन्हें रिहा करने के बारे में सरकार पहले ही घोषणा कर चुकी है.

शुक्रवार को माओवादियों की और से इन 23 के अलावा पांच अन्य लोगों की रिहाई की मांग की गई थी. बाकी दो लोग - चक्र तादिंगी और बिजय तादिन्गी - उन पांच लोगों की सूची में हैं जिन्हें पाओलो की रिहाई के बदले मुक्त करने के लिए सरकार ने घोषणा की है.

अपहरण

माओवादियों ने जिन पांच अतिरिक्त लोगों की रिहाई की मांग की है उनमें से एक छेड़ा भूषणं उर्फ़ घासी कट्टर माओवादी है, जिसके ऊपर आंध्र सरकार ने दस लाख रुपये का इनाम रखा है.

उधर इतालवी पर्यटक बोसुस्को पाओलो की रिहाई की जो उम्मीद शनिवार को जगी थी, वो रविवार को बिखर गई.

सीपीआई माओवादी ओडिशा राज्य सांगठनिक कमिटी के सचिव सब्यसाची पंडा ने एक ऑडियो टेप के जरिए सरकार से इस बारे में स्पष्टीकरण माँगा है कि उनके द्वारा जिन सात लोगों की रिहाई की मांग की गयी थी, उनमें से किन पांच को रिहा करने के लिए सरकार तैयार है.

साथ ही उन्होंने सरकार से इस बात पर भी स्पष्टीकरण माँगा है कि इतालवी पर्यटक की रिहाई के लिए दी गयी 13 शर्तों में से कौन सी शर्तें सरकार को मंज़ूर हैं और कौन नहीं.

शनिवार की शाम सरकार और माओवादी नियुक्त मध्यस्थों के हस्ताक्षर के साथ एक साझा बयान जारी किया गया था जिसमें पाओलो की रिहाई के बदले पांच कैदियों की रिहाई के अलावा बाकी मांगों पर दोनों पक्षों में सहमति की बात कही गयी थी.

इस 'समझौते' के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि माओवादी पाओलो को छोड़ देंगें, लेकिन अपने ऑडियो सन्देश से सब्यसाची पंडा ने ऐसी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है.

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