आज़म ख़ान की इमाम बुख़ारी को खुली चुनौती

आज़म ख़ान और सैय्यद अहमद बुख़ारी इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption आज़म ख़ान की चुनौती पर फिलहाल इमाम बुखारी ने प्रतिक्रिया नहीं दी है.

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैय्यद अहमद बुख़ारी पर ताज़ा हमला करते हुए समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आज़म ख़ान ने कहा है कि बुख़ारी को मुरादाबाद के मेयर का चुनाव जीतकर दिखाना चाहिए.

आज़म ख़ान ने कहा कि अगर सैय्यद अहमद बुख़ारी मुरादाबाद के मेयर चुनाव में अपनी ज़मानत भी बचा पाते हैं तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे.

आज़म ख़ान ने सोमवार को लखनऊ में कहा, “मैं बुख़ारी को मुरादाबाद में मेयर का चुनाव लड़ने की चुनौती देता हूं. अगर उस चुनाव में उनकी ज़मानत ज़ब्त ना हुई तो में राजनीति छोड़ दूंगा.”

शाही इमाम पर तीख़ा हमला करते हुए आज़म ख़ान ने कहा, “उनका काम नमाज़ पढ़ना है, वहीं करें. हमें सभी की हैसियत पता है. ”

समाजवादी पार्टी के नेता और इमाम के बीच बयानबाज़ी पिछले हफ़्ते से चल रही है.

पार्टी ने बुख़ारी के दामाद को विधान परिषद का उम्मीदवार बनाया था लेकिन शाही इमाम ने मुलायम सिंह को ख़त लिखकर कहा था कि उत्तर प्रदेश के मुसलमानों को उनका हक नहीं मिल रहा है.

कद की लड़ाई

मुलायम सिंह को लिखे ख़त से भड़के आज़म ख़ान ने कहा था, “वो अपने भाई साहब के लिए राज्यसभा की सीट मांग रहे थे, अपने दामाद के लिए लाल बत्ती मांग रहे थे. उन्हें अगर ये सब मिल जाता तो मुसलमानों का सारा मसला हल हो जाता.”

सात अप्रैल को दिए अपने बयान में आज़म ख़ान ने आगे कहा था, “जिस विधानसभा सीट पर 80 फ़ीसद मुसलमान मतदाता हैं, वहां से इमाम साहब के दामाद अकेले मुस्लिम उम्मीदवार थे लेकिन उनकी ज़मानत ज़ब्त हो गई. उन्हें ख़ुद भी इस बात के लिए शर्मिंदा होना चाहिए कि उत्तर प्रदेश के मुसलमानों में उनकी क्या हैसियत है.”

आज़म ख़ान के बयान के बाद तो शाही इमाम बुरी तरह नाराज़ हो गए. उन्होंने कहा कि वे आज़म ख़ान की शक्ल तक नहीं देखना चाहते.

उन्होंने एक भारतीय टीवी चैनल को उन्होंने बताया, "मुसलमान आज़म खान से नफरत करता है क्योंकि वो मुसलमानों के दुश्मन हैं. मैंने मुलायम सिंह से कहा कि इससे मंत्रालय लिए जाएं और ऐसे मुसलमान को दिए जाएं तो मुसलमानों का काम कर सके."

आज़म ख़ान अपने तल्ख़ अंदाज़ और कटाक्ष भरे बयानों के लिए जाने जाते हैं.

समाजवादी पार्टी में उनका कद काफ़ी बड़ा है, इसीलिए कुछ दिन पार्टी के बाहर रहने के बाद भी वो अब पहले जैसी हैसियत के साथ उत्तर प्रदेश की कैबिनेट में है.

ऐसे में ज़ाहिर है कि इस वाक युद्ध का आख़िरी वाक्य अभी लिखा जाना बाक़ी है.

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