काजमी की गिरफ़्तारी: पुलिस के दावों को चुनौती

काजमी सॉलिडेरीटी कमेटी
Image caption काजमी सॉलिडेरिटी कमेटी के लोग बुधवार को दिल्ली में पत्रकारों को संबोधित करते हुए.

भारत की राजधानी नई दिल्ली स्थित इसराइली दूतावास की एक कार में हुए बम धमाके के आरोप में गिरफ्तार पत्रकार सैयद मोहम्मद अहमद काजमी के मामले में नागरिक समाज के कुछ लोगों ने पुलिस के दावों को खारिज कर दिया है.

दिल्ली में 13 फरवरी को हुए इस धमाके में एक इसराइली राजनयिक की पत्नी घायल हो गईं थी.

उस बम धमाके के आरोप में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने छह मार्च को वरिष्ठ पत्रकार मोहम्मद काजमी को गिरफ्तार किया था और फिलहाल वो न्यायिक हिरासत में दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं.

बुधवार को काजमी के समर्थन में दिल्ली में जमा हुए नागरिक समाज के कुछ लोगों ने कहा कि पुलिस ने काजमी के खिलाफ जो आरोप लगाए हैं वे सारे बेबुनियाद हैं.

इस मौके पर उनके समर्थकों ने 'काजमी सॉलीडेरिटी कमेटी' के गठन की भी घोषणा की.

विदेशों से पैसे

कमेटी के लोगों ने काजमी और उनकी पत्नी के बैंक खाते में विदेश से आए पैसे के पुलिस के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि उनके खाते में विदेशों से आए सारे पैसे कानूनी तरीकें से आए थे और वे पैसे दुबाई में रह रहे काजमी के बड़े बेटे ने भेजे थे.

संवाददाता सम्मेलन में कमेटी ने बैंक खाते के स्टेटमेंट भी जारी किया जिसके अनुसार काजमी की पत्नी जहां आरा काजमी के खाते में पिछले चार सालों में पैसे आए हैं.

गौरतलब है कि काजमी की गिरफ्तारी पर मार्च में एक संवाददाता सम्मेलन में खुद दिल्ली पुलिस आयुक्त बीके गुप्ता ने कहा था कि काजमी और उनकी पत्नी के खाते में विदेशों से लगातार पैसे आ रहें हैं.

इस मौके पर सॉलीडेरिटी कमेटी के एक सदस्य, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता कॉलिन गनजाल्वेज, ने बीबीसी को बताया कि कानूनी नजरिए से देखा जाए तो काजमी के खिलाफ़ मामला बहुत ही कमजोर है.

कॉलिन का कहना था, ''काजमी के खिलाफ जो सबूत हैं उनमें कोई दम नहीं है. जहां तक विदेशों से पैसे आने का सवाल है तो हमारे देश में हजारों ऐसे लोग हैं जिनके पास हर महीने खाड़ी देशों से पैसे आते हैं. जहां तक विदेशों में फोन करने का सवाल है तो पत्रकार तो विदेशों में कॉल करते रहते हैं, इसमें कोई दम नहीं है. मेरे ख्याल से पुलिस के पास उनके खिलाफं कोई सबूत नहीं है.''

कॉलिन ने ये भी आरोप लगाया कि काजमी को गिरफ्तार करने का फैसला दिल्ली पुलिस तक सीमित नहीं है. उनके अनुसार अमरीकी और इसराइली लॉबी को संतुष्ट करने के लिए गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय के स्तर पर काजमी को गिरफ्तार करने का फैसला किया गया है.

सॉलीडेरीटी कमेटी की एक और सदस्य जानी मानी पत्रकार सीमा मुस्तफा ने कहा कि इस केस के बहाने इसराइल अपने भू-राजनीतिक हित साधने की कोशिश कर रहा है.

सीमा ने कहा कि धमाके के फौरन बाद इसराइल ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहरा दिया था लेकिन भारत सरकार ने ईरान के खिलाफ़ कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था.

सीमा के आगे कहना था, ''उसके बाद इसराइल का भारत और खासकर गृह मंत्रालय पर इस नीति को बदलने दबाव बढ़ने लगा और काजमी की गिरफ्तारी इस बात का पहला सबूत है कि भारत ने इस मामले में अपनी राय बदल ली है. काजमी की गिरफ्तारी के बाद से ही बैंकॉक धमाके से तार जोड़े जाने लगे.''

सॉलीडेरीटी कमेटी ने कहा है कि वे इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेगी और जल्द ही एक जनसभा भी आयोजित की जाएगी.

इस कमेटी में पत्रकार जॉन चेरियन, सुकुमार मुर्लीधरन, जफर आगा, सीमा मुस्तफा, संदीप दिक्षित, सईद नकवी, कुल्दीप नैयर सबा नकवी, प्रफुल बिदवई, इफ्तिखार गिलानी, संजय कपूर, अजित साही वगैरह के अलावा कॉलिन गनजाल्वेज, शबनम हाशमी, नित्या रामाकृष्णन, मनीषा सेठी, कमल मित्र चिनॉय जैसे मानवाधिकार कार्यकर्ता और शिक्षाविद शामिल हैं.

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