यशवंत सिन्हा का आत्मसमर्पण, रिहा भी हुए

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Image caption एनडीए सरकार में यशवंत सिन्हा केन्द्रीय मंत्री रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा और 18 अन्य लोगों ने गुरूवार को हजारीबाग में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया और फिर सबूतों के अभाव में उन्हे रिहा भी कर दिया गया.

मामला बुधवार का है जब सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी सीसीएल ने यशवंत सिन्हा समेत इन सभी लोगों के खिलाफ अपने एक महाप्रबंधक को 'बंधक' बनाने का आरोप लगाया था.

सीसीएल ने यह आरोप मढ़ते हुए यशवंत सिन्हा और अन्य 18 लोगों के खिलाफ हजारीबाग में ऍफआईआर दर्ज कराई थी.

इस रिपोर्ट में में कहा गया था कि इन लोगों ने सीसीएल के अधिकारी को चरही स्थित उनके दफ्तर में 'बंधक' बना लिया था. इसके बाद गुरूवार को यशवंत सिन्हा और उनके समर्थक खुद ही चरही पुलिस थाने पहुंचे और सहायक पुलिस आयुक्त सुदर्शन मंडल के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया.

इलाके के सब डिवीजनल अधिकारी कुमकुम प्रसाद ने बताया, "हमारी जांच से इस बात का पता चला कि यशवंत सिन्हा और उनके समर्थकों पर लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित नहीं किया जा सकता और जांच के बाद उन्हें जाने दिया गया."

'सत्याग्रह'

मामले की शुरुआत तब हुई थी जब भारी तादाद में लोग सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड से इस बात की मांग करने के लिए जुट गए थे कि इलाके में कोयला इकठ्ठा करने के लिए एक नई जगह बनायी जाए.

इन लोगों का मानना है इस तरह कोयले की होने वाली बिक्री से फुसरी इलाके के ग्रामीणों को आर्थिक मदद मिल सकेगी और फ़ायदा होगा.

लेकिन सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के महाप्रबंधक ने इस तरह की मांग यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि इलाके में पहले से ही कोयला जमा करने का पर्याप्त ठिकाना है और दूसरे की ज़रुरत नहीं है.

जबकि मामले में नामजद लोगों का कहना था कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है और सिर्फ सत्याग्रह की प्रक्रिया से विरोध दर्ज कर रहे थे.

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने वरिष्ठ नेता अरु सांसद यशवंत इसी इलाके के पास से सांसद है और प्रदेश की राजनीति में खासा सक्रिय भी रहते हैं.

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