जंगली जानवरों ने किया नुकसान तो 'भरपाई' करे सरकार

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बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बाघ सहित सभी जंगली जानवर सरकार की संपत्ति है. हाई कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर जंगली जानवर किसी इंसान को या उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं तो उसकी भरपाई सरकार को करनी पड़ेगी.

न्यायमूर्ति शरद बोबडे और प्रसन्ना वार्ले वाली दो सदस्यीय खंडपीठ ने अपने फैसला सुनाते हुए कहा है कि राज्य सरकार को वर्धा के किसान बाबुराव अग्लवे को तीन लाख 84 हजार रूपए हर्जाना देने को कहा है.

वर्ष 2010 में 65 वर्षीय बाबुराव अग्लवे की केले की फसल बाघों की वजह से बर्बाद हो गई थी. किसान बाबुराव का आरोप था कि चूंकि बाघ केले के खेत में रह रहा था इसलिए बाघ के डर से वह अपनी फसल को देखने के लिए खेत नहीं जा पाते थे.

देना होगा हर्जाना

बाबुराव ने तीन लाख 84 हजार रूपए हर्जाने की मांग की थी. हर्जाने में 18 फीसदी ब्याज दर भी शामिल थी. इसकी अनुशंसा वन विभाग ने भी की थी और हर केले के पेड़ के लिए 48 रूपए देने का अनुमोदन भी किया था.

हालांकि राज्य के वित्त विभाग ने किसान की इस मांग को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उसके पास इस तरह के हर्जाने का कोई प्रावधान नहीं है.

किसान ने अपनी याचिका में कहा था कि बाघ द्वारा गाय की हत्या किए जाने पर किसी को हर्जाना मिल सकता है तो बाघ द्वारा उसकी फसल को नष्ट दिए जाने पर हर्जाना क्यों नहीं मिल सकता है?

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, “ चूंकि प्रावधान में कहा गया है कि जंगली जानवर सरकारी संपत्ति है और उसका शिकार करना अवैध है, इसलिए हमारा मानना है कि जंगली जानवरों को सभी तरह से सरकारी संपत्ति माना जाना चाहिए.”

कोर्ट ने सरकार को ऐसी नीति बनाने का निर्देश दिया जिससे लोगों को ऐसी परिस्थिति में हुए नुकसान की भरपाई की जा सके.

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