जबरन कोरे पन्ने पर लिखवाया: प्रोफेसर

  • 14 अप्रैल 2012
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Image caption प्रोफेसर के साथ मारपीट के आरोप में चार लोगों को पकड़ा गया जिन्हें बाद में जमानत दे दी गई.

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर व्यंगात्मक कार्टून को ईमेल करने के मामले में शुक्रवार को गिरफ्तार और फिर रिहा हुए जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा का कहना है कि उनके साथ तृणमूल समर्थकों ने मारपीट की और धमकाया.

प्रोफेसर महापात्रा ने आरोप लगाया है कि तृणमूल पार्टी के सदस्यों ने उन्हें मारने-पीटने के बाद उनसे एक कोरे कागज पर लिखवाया कि ‘वो वामपंथी समर्थक हैं और उन्होंने ही व्यंगात्मक छवियां बनाईं’.

उन्होंने कहा, ''मैंने ईमेल सिर्फ बढ़ाए, खुद नहीं लिखे. मुझसे कोरे कागज पर लिखवाया गया कि मैं सीपीएम का समर्थक हूं और मैंने ये मेल खुद लिखे हैं और फोटो के साथ छेड़छाड़ की है. ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना रही लेकिन अगर आगे भी मुझे किसी तरह के व्यंगात्मक ईमेल आए तो मैं उन्हें फॉर्वर्ड करता रहूंगा.''

मारपीट के मामले में प्रोफेसर महापात्रा ने एक मामला भी दर्ज करवाया था. स्थानीय पत्रकार पीएम तिवारी के अनुसार प्रोफेसर ने अपने जान को खतरे की भी शिकायत की है.

मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के सात समर्थकों को अभियुक्त बनाया जिसमें से चार लोगों को गिरफ्तार किया गया और जबकि तीन फरार है.

हालांकि गिरफ्तार किए गए चारों लोगों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है.

मामला

Image caption कार्टून पर उपजे विवाद के मामले में प्रोफेसर के साथ मारपीट और उन्हें जेल भेजे जाने की कड़ी आलोचना हो रही है

इससे पहले प्रोफेसर को कोलकाता पुलिस ने इंटरनेट पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की कथित आपत्तिजनक तस्वीर जारी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. बाद में उन्हे मुचलके पर रिहा कर दिया गया था.

जादवपुर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा रसायन शास्त्र पढ़ाते हैं. भारतीय दंड विधान की कई धाराओं के अलावा उनके खिलाफ पुलिस ने साइबर अपराध से जुड़े कानून की धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया है.

कोलकाता पुलिस के डिप्टी कमीश्नर सुजॉय चंदा ने कहा है, ”प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा को किसी सम्मानित व्यक्ति के खिलाफ अपमानजनक संदेश भेजने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है.”.

दूसरी तरफ, राज्य सरकार द्वारा प्रोफेसर की गिरफ्तारी का विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और बुद्धिजीवी समुदाय ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला मानते हुए कड़ी निंदा की है.

निंदा करने वालों में वे लोग भी शामिल हैं जिन्हें ममता बनर्जी का नजदीकी माना जाता हैं.

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