टाइटैनिक पर थीं छत्तीसगढ़ की एन्नी!

टाइटैनिक (फाइल)

सौ साल पहले 15 अप्रैल की रात जब विश्व के सबसे बड़े जहाज (उस समय के) टाईटैनिक ने समुद्र तल में लंबा गोता लगाया था तो उसके 1500 यात्रियों में भारत के छत्तीसगढ़ राज्य से संबंध रखनेवाली एक महिला भी शामिल थीं.

एन्नी क्लेमर फंक, चांपा-जांजगीर में मेनोनाईट मिशनरी के रूप में काम कर रहीं थीं.

एन्नी एक मिशनरी के रूप में इस इलाके में 1906 में आईं थीं और फिर कई तरह के सामाजिक कार्यों को अंजाम दिया. विदेशी होते हुए भी उन्होंने यहाँ की भाषा और संस्कृति को अपना लिया था.

उन्होंने कुपोषित बच्चों के बीच काफी काम किया और एक स्कूल भी खोला जिसमें खास तौर पर ग़रीब लड़कियों की शिक्षा पर खास ध्यान दिया जाता था.

यादें

हालांकि अब स्कूल भवन का खंडहर मात्र ही बचा रह गया है लेकिन एन्नी पूरी तरह से भुलाई नहीं गईं.

चांपा-जांजगीर के बुजुर्ग बताते हैं कि एन्नी को अपनी बीमार मां को देखने अमरीका जाना था. वो छत्तीसगढ़ से पहले मुंबई गईं और फिर पानी के जहाज़ से इंग्लैंड रवाना हुईं.

ब्रिटेन से अमरीका पहुंचने के लिए उन्हें एसएस हेवार्फोर्ड जहाज़ लेना था मगर कोयला मजदूरों की हड़ताल की वजह से हेवाफोर्ड यात्रा पर नहीं जा सका और अन्नी ने टाईटैनिक में अपना टिकट बुक कर लिया.

इंटरनेट पर मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि जब टाईटैनिक डूब रहा था तो एन्नी की मदद के लिए एक राहत नाव भी पहुंची लेकिन उन्होंने ये मौका जहाज़ में मौजूद एक महिला और उसके दूध मुहे बच्चे को देना ज्यादा उचित समझा.

एन्नी के जीवन पर एक वृतचित्र भी तैयार किया गया है जिसका प्रदर्शन अमरीका के पेनीसिल्वेनिया स्थित उनके पेट्रिक शहर में किया जा रहा है.

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