क्या है अग्नि 5 की विशेषता

  • 19 अप्रैल 2012
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अग्नि-5 मिसाइल के परीक्षण के साथ भारत उन चंद देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलें हैं.

अग्नि-5 की मारक क्षमता पाँच हजार किलोमीटर से भी ज्यादा है.

अग्नि पांच मिसाइल की लंबाई 17.5 मीटर है और इस पर करीब 2500 करोड़ रुपए की लागत आई है. ये मिसाइल 1.5 टन का हथियार चीन के अंदर तक ले जाने में सक्षम है.

वर्ष 2014-15 तक पूरी तरीके से सेना में शामिल किए जाने के बाद ये मिसाइल भारत की परमाणु निरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी.

अग्नि मिसाइलें परमाणु हमलों के खिलाफ भारत की प्रतिरोधी क्षमता का अहम हिस्सा हैं. इन मिसाइलों की रेंज 700 किलोमीटर से शुरु होती है और अब अग्नि 5 आने के बाद पाँच हजार किलोमीटर तक हो गई है.

इसे रक्षा अनुसंधान एंड विकास अनुसंधान (डीआरडीओ) ने ही विकसित किया है. डीआरडीओ प्रमुख वीके सारस्वत ने कहा है कि ब्रिटेन, चीन, रूस और चीन जैसे देशों में जो अंतर महाद्वीपीय मिसाइलें हैं अग्नि 5 उन्हीं की टक्कर की है.

उन्होंने तो हाल ही में दिल्ली में हुए डिफेंस एक्सपो में ये भी कहा था कि अग्नि 5 में इस्तेमाल की गई तकनीकें अमरीका जैसे देशों की मिसाइलों में उपयोग होने वाली तकनीक से भी बेहतर है. अग्नि 5 की तकनीकों में समग्र रॉकेट मोटर, माइक्रो नेवीगेशन सिस्टम ( एमआईएनडीएस) शामिल है.

विकसित तकनीक

अग्नि तीन 3500 किलोमीटर की रेंज वाली टू स्टेज इंडरमीडियेट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल थी और अब अग्नि 5 में तीसरा छोटा स्टेज जोड़ दिया गया है. साथ ही अग्नि 5 का वजन भी कम रखा गया है. यानी इसका डिजाइन ऐसा है कि ये उससे 1500 किलोमीटर ज्यादा दूरी तक मार कर सकती है.

डीआरडीओ के वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 2010 में अग्नि 3 के सफल प्रक्षेपण और उसके बाद 2011 में अग्नि 4 के सफल प्रक्षेपण के बाद उसी डिजाइन को अग्नि 5 के लिए विकसित किया गया है. दोनों मिसाइलों में एक्लसलेरोमीटर समेत 60 फीसदी हिस्से समान हैं.

डीआरडीओ द्वारा संचालित एडवांडस्ड सिस्टम्स लैबोरट्री अग्नि मिसाइलों के विकास में अहम भूमिका निभाती रही है.

संस्था के निदेशक अविनाश चंदर के मुताबिक अग्नि 5 के विकास में तीसरी स्टेज पर काम करना बड़ी तकनीकी चुनौती रही है.

उन्होंने अक्तूबर में कहा था, “अग्नि 5 के तीसरी स्टेज का कोनिकल मोटर है. अब तक हमने केवल बेलनाकार (सिलंड्रिकल) मोटर पर काम किया था. कोनिकल मोटर पर काम मुश्किल था.”

चीन पर नजर

इंस्टीट्यूट ऑफ़ नेशनल सेक्युरिटी स्टडीज़ के संयुक्त निदेशक सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर अरुण सहगल मानते हैं कि अग्नि 5 भारत को चीन के खिलाफ वो कवच देगा जो अब तक उसके पास नहीं था.

चीन के खिलाफ 1962 के युद्ध में भारत को काफी नुकसान हुआ था. भारत दावा करता रहा है कि चीन की बढ़ती परमाणु क्षमता बड़ी वजह थी कि उसने मई 1998 में पाँच भूमिगत परमाणु परीक्षण किए थे.

चीन की अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल और इंडरमीडियेट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता (आईआरबीएम) पर चिंता के कारण ही भारत ने अपने देश में विकसित मिसाइल क्रार्यक्रम को तेजी से बढ़ाया ताकि वो लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें तैयार कर सके.

भारत की सैन्य नीति के रणनीतिकार चीन की डीएफ 21 इंडरमीडियेट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल और इसके अन्य संस्करणों को लेकर चिंतित रहे हैं. इन मिसाइलों की रेंज 1500 से लेकर 2250 किलोमीटर है. इन्हें तिब्बत, में तैनात किया गया है जहाँ से नई दिल्ली समेत भारत के अन्य शहरों को निशाना बनाया जा सकता है.

भारत की इंडरमीडियेट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलों में अग्नि 1, अग्नि 2 और अग्नि 3 शामिल है जिनकी रेंज क्रमश 700-800 किलोमीटर, 2000-2300 किलोमीटर और 3500 किलोमीटर से ज्यादा है.

इन्हें डीआरडीओ की देखरेख में हैदराबाद में भारत डायनामिक्स लिमिटिड तैयार करती है और इन्हें स्ट्रेटेजिक फोर्सिस कमांड (एसएफसी) ऑपरेट कर रहा है.

स्ट्रेटेजिक फोर्सिस कमांड का गठन 2003 में किया गया था. इस पर भारत के परमाणु हथियारों के जखीरे के प्रबंधन और प्रशासन की जिम्मेदारी है. इसके अलावा एसएफसी भारत के न्यूक्लीयर कमांड अथॉर्टी (एनसीए) का हिस्सा भी है.

अग्नि1 मिसाइल एक हजार किलोग्राम तक के हथियार 700 किलोमीटर की दूरी तक ले जा सकता है. अग्नि 1 और अग्नि 2 को परमाणु हथियार संपन्न पाकिस्तान को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.

लेकिन परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अग्नि3 को चीनी सेना और तिब्बत में परमाणु असलहे के मद्देनजर तैयार किया गया था. तिब्बत चीन और भारत दोनों के लिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता जा रहा है.

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