नितिन गर्ग मामले में दोषी की अपील खारिज

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Image caption जज ने नितिन गर्ग बत्या मामले में कहा था कि ये अपराध पूर्व नियोजित नहीं था.

ऑस्ट्रेलिया की एक अदालत ने भारतीय छात्र नितिन गर्ग की हत्या के मामले में 13 साल की सजा पा चुके युवक की सजा पर फिर से विचार की अपील खारिज कर दी है.

ये घटना साल 2010 में घटी थी और उस वक्त ये युवक 15 साल का था. युवक का नाम उसकी उम्र को देखते हुए सार्वजनिक नहीं किया गया था.

अपील में इस युवक ने कहा था कि उसने वो अपराध मान लिया था और वो गैर इरादतन अपराध था मगर उसके बावजूद उसकी कम उम्र को देखते हुए सजा बहुत ज्यादा दी गई.

लेकिन विक्टोरियन कोर्ट ऑफ़ अपील के तीन जजों मर्सिया नीव, पीटर बुकनन और बर्नाड बोंगिओरनो ने इस युवक की अपील खारिज कर दी.

बुकनन ने आदेश में कहा कि जज पॉल कॉगलान ने इस मामले पर युवक की उम्र और अपराध की गंभीरता के बीच संतुलन बनाकर फैसला सुनाया है.

मामला

नितिन गर्ग की हत्या दो जनवरी 2010 में रात साढ़े नौ बजे के बाद उस वक्त हुई जब वह मेलबर्न में याराविल के हंग्री जैक में काम करने के लिए एक पार्क में से गुज़र रहे थे.

ये मामला विक्टोरियन सुप्रीम कोर्ट में आया था और सज़ा सुनाते वक्त जज पॉल कॉगलान ने कहा था की ये अपराध पूर्व नियोजित नहीं था और न ही नस्लभेद से प्रेरित था.

जस्टिस पॉल कॉगलान ने बताया था कि नितिन गलत समय पर गलत जगह होने के कारण इस अपराध के शिकार बन गए.

जस्टिस कॉगलान ने अपने आदेश में कहा था कि यह युवा और उसका एक मित्र पार्क में थे जब उन्होंने नितिन को फ़ोन पर बात करते हुए देखा और उसने फ़ोन चुराने के लिए अपना चाकू निकाला.

उसके बाद नितिन ने लड़के को पकड़ लिया लेकिन उसने नितिन के पेट में चाकू मार दिया. छुरा मारे जाने के बाद नितिन किसी तरह गिरते पड़ते हंग्री जैक तक पहुंचे लेकिन कुछ समय बाद ही रॉयल मेलबर्न अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई.

इस युवा के मित्र को हत्या में सहायक होने के लिए पहले ही सज़ा सुना दी गई है.

इस मामले के सामने आने के बाद भारत ने इस मुद्दे को शीर्ष स्तर उठाया था साथ ही दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में भी खटास आ गई थी.

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