हम काले दिन में रह रहे हैं :वैज्ञानिक रे

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Image caption राज्य में हाल ही में हुई घटनाओं के बाद ममता बैनर्जी की खासी आलोचना हो रही है.

कोलकाता में झोपड़ियों को हटाने के विरोध में कथित तौर पर भूमिका निभाने के लिए जेल भेजे गए जाने-माने वैज्ञानिक पार्थों सारथी रे को बुधवार को रिहा कर दिया गया है.

जेल से रिहा होने के बाद प्रोफेसर पार्थों सारथी का कहना था कि उन्हें गलत मामले में फंसाया गया है.

एक पत्रकार सम्मेलन में प्रोफेसर ने कहा,'' मुझे और 68 अन्य लोगों को उस समय हिरासत में ले लिया गया था जब शांतिपूर्ण प्रदर्शन हो रहे थे और 10 दिन के बाद छोड़ा गया. मैं उस समय मौके पर मौजूद नहीं था बल्कि 70 किलोमीटर दूर अपने संस्थान में था. मेरे ये सब बताने के बावजूद मुझे खौफनाक दिनों से गुजरना पड़ा. उन्होंने मुझे गलत मामले में फंसाया और डराया है.''

अपना पक्ष रखते हुए प्रोफेसर ने कहा कि अमरीका में मुझे दो पदों पर नौकरी का प्रस्ताव था उसके बावजूद मैंने नौकरी नहीं ली क्योंकि मैं अपने राज्य लौटना चाहता था ताकि मैं नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों को शिक्षित और प्रशिक्षण दे सकूं.

काले दिन

उनका कहना था,''राज्य में हम काले दिन में रह रहे हैं जो ये बताता है कि राज्य में कानून-व्यवस्था की क्या स्थिति है. मुझे और मेरे परिवार को आघात पहुंचा है और मेरे पेशे को नुकसान हुआ है. मेरे साथ जेल गए छह और लोग अभी जेल में हैं. ये सभी लोग झुग्गी झोपड़पट्टियों में रहने वाले लोगों के समर्थन में आगे आए थे और मुझे उम्मीद है कि मेरी रिहाई उनके लिए जेल से निकलने का रास्ता खोलेगी."

जीव-विज्ञानी प्रोफेसर रे को रुबी मोर में हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन मे भाग लेने के बाद आठ अप्रैल को गिरफ्तार कर लिया गया था.

इन लोगों ने पूर्वी कोलकाता के नॉंनदंगा बस्ती को खाली करने के लिए चले अभियान के विरोध में ये प्रदर्शन किया था. हालांकि प्रोफ़ेसर रे पर ये आरोप लगे थे कि उन्होंने चार अप्रैल को प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज में पुलिसकर्मी के साथ हाथापाई की थी.

प्रोफेसर रे के वकील ने दावा किया था कि वे चार अप्रैल को हुए इस प्रदर्शन के दौरान वहां मौजूद नहीं थे. जब ये विरोध प्रदर्शन हो रहा था उस समय वे मोहनपुर में स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च में पढ़ा रहे थे. उनका कहना था कि कोलकाता से यहां पहुंचने में दो घंटे का समय लगता है.

हस्तक्षेप

प्रोफेसर की गिरफ्तारी के बाद भारत और विदेश के जाने-माने वैज्ञानिकों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की थी.

उन्होंने एक और वैज्ञानिक अंबिकेश महापात्रा के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई की भी निंदा की थी.

पिछले हफ्ते जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आधारित व्यंगात्मक कार्टून को ईमेल करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था.

रिहा होने के बाद प्रोफेसर अंबिकेश महापात्रा ने कहा था कि उनके साथ तृणमूल समर्थकों ने मारपीट की और उन्हें धमकाया था.

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