सुप्रीम कोर्ट से संजीव भट्ट को राहत

  • 20 अप्रैल 2012
संजीव भट्ट इमेज कॉपीरइट PTI
Image caption संजीव भट्ट ने इस केस की जांच किसी निष्पक्ष संस्था से करवाने की मांग की है

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट के ख़िलाफ़ अपने सरकारी ड्राइवर को झूठा बयान देने के लिए मजबूर करने के मामले पर रोक लगा दी है.

ड्राइवर ने पहले बयान दिया था कि साल 2002 में हुए दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की सरकार ने कोई दंगाइयों पर कार्रवाई ना करने को कहा था.

संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि उनके ख़िलाफ केस मनगढ़ंत है और ये राजनीतिक बदले की भावना का परिणाम है.

उन्होंने याचिका में सारे मामले की किसी निष्पक्ष संस्था से जांच करवाने की भी मांग की थी.

भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी संजीव भट्ट पर आरोप है कि उन्होंने अपने ड्राइवर केडी पंत पर इस बात के लिए दबाव डाला था कि वो अदालत को बताएं की 27 फ़रवरी 2002 की शाम वो भट्ट को मुख्यमंत्री निवास पर ले गए थे.

संजीव भट्ट का दावा है कि उस दिन उन्होंने मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात कर बताया था कि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी दंगाईयों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.

उनके ड्राइवर केडी पंत बाद में अपने इस बयान से मुकर गए थे कि वो भट्ट को मुख्यमंत्री निवास तक ले गए थे. पंत ने कहा था कि उन्होंने पहला बयान भट्ट के दबाव में आकर दिया था.

गांधीनगर में रह रहे संजीव भट्ट इस समय नौकरी से निलंबित चल रहे हैं.

बीबीसी न्यूज़ मेकर्स

चर्चा में रहे लोगों से बातचीत पर आधारित साप्ताहिक कार्यक्रम

सुनिए

संबंधित समाचार