तकनीक पर काम करते समय लिंगभेद नहीं: थॉमस

  • 20 अप्रैल 2012
टेरी थॉमस
Image caption थॉमस कहती हैं कि उन्हें अपनी पति और बेटे तेजस का भरपूर समर्थन मिला

मीडिया में टेसी थॉमस को ‘मिसाइल महिला’ कहा जाता है... और इसके कई कारण हैं.

रक्षा अनुंसधान एवम् विकास संगठन (डीआरडीओ) में कार्यरत टेसी थॉमस एक ऐसी महिला हैं जिन्होंने आणविक मिसाइल अग्नि–5 के सफल परीक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

वो शायद दुनिया की एक मात्र महिला हैं जो सामरिक रूप से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में इस स्तर पर काम कर रही हैं.

पुरुषों के प्रभुत्व वाले इस क्षेत्र में जहाँ मिसाइलों के कार्यक्रमों की हर जानकारी को बेहद गुप्त रखा जाता है, 49-वर्षीय थॉमस सबसे अलग खड़ी दिखती हैं.

लेकिन थॉमस का कहना है कि उन्होंने कभी भी किसी को महिला विरोधी रुख अपनाते नहीं देखा.

उनका कहना है, “तकनीक पर काम करते वक्त कोई लिंग भेद नहीं होता है. अगर आपका काम अच्छा है तो आप अलग खड़े दिखते हैं. मैने अपने दफ़्तर में कोई भी महिला विरोधी रुख नहीं देखा है.”

एक अखबार में खबर छपी है कि उनका नाम अग्नि-5 के प्रक्षेपण से जुड़ी प्रेस रिलीज़ में नहीं है. इस पर जवाब में वह कहती हैं, "ऐसा नहीं है, मेरा नाम हर जगह है, और शायद किसी से मेरा नाम छूट गया हो, लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता."

दक्षिणी केरल के अलेप्पी की रहने वाली टेसी थॉमस रोमन कैथोलिक हैं और उनके पिता एक छोटे व्यापारी थे.

वो एक रॉकेट प्रक्षेपण सेंटर के नज़दीक बड़ी हुईं और बचपन से ही उन्हें रॉकेटों का शौक रहा.

शुरुआती पढ़ाई

केरल में स्कूल और कॉलेज खत्म करने के बाद उन्होंने 20 साल की उम्र में स्नातक की डिग्री के लिए पुणे का रुख किया.

यहाँ उनकी मुलाकात सरोज कुमार से हुई जिनसे उन्होंने बाद में शादी की.

सरोज कुमार भारतीय नौसेना में कॉमोडोर के पद पर कार्यरत हैं.

टेसी थॉमस कहती हैं कि वो दरअसल 'शांति के हथियारों' पर काम कर रही हैं लेकिन उनके लिए परिवार और काम के बीच तारतम्य स्थापित करना ज्यादा मुश्किल काम रहा है.

थॉमस के मुताबिक कभी-कभी उन्हें समझ नहीं आता कि वो परिवार के प्रति अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाएँ कि मिसाइल कार्यक्रम पर ध्यान दें.

थॉमस कहती हैं कि उन्हें पति और बेटे तेजस का भरपूर समर्थन मिला. तेजस इंजीनियरिंग के छात्र हैं. तेजस डीआरडीओ द्वारा निर्मित लाइट कांबेट हवाई जहाज का भी नाम है.

वर्ष 2008 में भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ ने महिला वैज्ञानिकों के लिए थॉमस को रोल मॉडल और प्रेरणास्रोत बताया था.

टेसी थॉमस कहती हैं कि जब उन्होंने डीआरडीओ में काम करना शुरू किया तो बहुत कम महिलाएँ वहाँ काम करती थीं, लेकिन उनकी संख्या बढ़ी है और अब महिलाएँ महत्वपूर्ण मिसाइल कार्यक्रमों में अपनी भूमिका निभा रही हैं.

जनवरी में भारतीय विज्ञान समारोह में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पुरुष-प्रधान समाज में अपना स्थान बनाने के लिए टेसी थामस की काफ़ी प्रशंसा की थी.

पिछले वर्ष तीन महिला वैज्ञानिकों को भारतीय विज्ञान के सबसे बड़े पुरस्कार शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 1958 और 2010 के बीच मात्र 11 महिलाओं ने ये पुरस्कार जीता था.

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