चाय भारत का राष्ट्रीय पेय

चाय
Image caption भारत में 83 फ़ीसदी घरों में चाय का इस्तेमाल होता है

अब भारतीय चाय की चुस्की ले राहत ही नहीं गौरव भी महसूस कर सकते हैं क्योंकि चाय जल्द ही राष्ट्रीय पेय होगी.

योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने शनिवार को कहा कि चाय को अगले साल अप्रैल में राष्ट्रीय पेय घोषित किया जाएगा.

असम के जोरहाट में असम टी प्लांटर्स एसोसिएशन के 75 वीं वर्षगाँठ के मौके पर आयोजित एक समारोह में अहलूवालिया ने कहा " आगमी 17 अप्रेल को चाय को राष्ट्रीय पेय घोषित किया जाएगा. इसी दिन असम में चाय उगाने वाले पहले भारतीय और 1857 के विद्रोह के नायक मनीराम दीवान का जन्मदिन भी है."

कौन थे मनीराम दीवान

मनीराम दीवान ना केवल असम में चाय का पौधा रोपने वाले पहले भारतीय थे बल्कि वो एक क्रांतिकारी भी थे.

साल 1806 में पैदा हुए मनीराम अपनी किशोरावस्था में एक दिन कलकत्ता में घूम रहे थे कि उन्होंने कुछ अंग्रेज़ व्यापारियों को चाय के व्यवसाय में मुनाफे की बात करते हुए सुना.

दीवान ने उन व्यापारियों को बताया कि असम-अरुणाचल सीमा पर आदिवासी कुछ इसी तरह के पौधे उगते हैं. दीवान की बात सुन कर असम में जा कर सबसे पहले चाय उगाने वाले आदमी थे रॉबर्ट ब्रूस. दीवान ने साल 1845 में अपना खुद का चाय बागान स्थापित किया. बाद में उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ 1857 के ग़दर में भी भाग लिया जिसके कारण अंग्रेजों ने उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया.

भारत के लिए महत्वपूर्ण

भारत में चाय के महत्त्व के बारे में बोलते हुए अहलूवालिया ने कहा " चाय के महत्त्व के पीछे दूसरा महत्वपूर्ण कारण ये है कि यहाँ काम करने वाली श्रमिकों में आधी महिलाएं हैं और चाय उद्योग संगठित क्षेत्र का सबसे बड़ा रोज़गार दाता है."

अहलूवालिया ने भरोसा दिलाया कि वो केन्द्रिय वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा से इस बाबत बात करेगें.

भारत दुनिया में काली चाय का सबसे बड़ा उत्पादक देश है. दुनिया में काली चाय की सबसे ज़्यादा खपत भी भारत में ही होती है. एक सर्वेक्षण के अनुसार भारत में 83 फ़ीसदी घरों में चाय का इस्तेमाल होता है. साथी ही चाय, पानी के बाद सबसे ज़्यादा सस्ता पेयपदार्थ है.

भारत में पैदा होने वाली कुल चाय का आधा हिस्सा असम में पैदा होता है. साल 2011 में भारत में करीब 99 करोड़ किलो चाय पैदा हुई थी और उसमें असम में 50 करोड़ किलो चाय असम में उपजी थी.

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